मन मयूरा क्यू ना बोले
जब पवन चले पुरवाई बोले
होले होले बादल बोले
बिजली चमके मनवा डोले
चली फुहार रिमझिम की
 बयार चली ये तो सावन की
शिव का भी डमरू बोले
भंग शिवालय में भी घोले
लगा चंग का साथ मे देखो
कृष्णा भी संग में डोले 
रास रचाये धुन बंसी की
गोपियाँ मधुर मधुर संग बोले  फागुन में पीले फूलों से
रंग मिला नीले  बादल से जहाँ चले मन मस्त कबिरा
एकतारे की धुन भी बोले 
जब भी मन मयूरा बोले 
प्रकृति भी संग संग डोले 

संध्या पंवार