मेरे इश्क की कुछ ऐसी कहानी है,
जिस्म से जुदा  ,रूह से रूहानी है।
न मिले, न बिछड़े पर जीते जी को एक हो गए
,मरके भी जो सदा गूँजेगी  यह वो आसमानी है।
  एक मर्तवा भी तो जी भरके न देखा उन्हें,
पर दिल को उनकी याद हर एक निशानी है
बहुत खुश हैं वो यह हमको जताते हैं,
पर हमने देखा चुपके से आँख उनकी शादमानी है।
जो नजरों से शुरूहो और ऒर ज़हनों में खत्म,
हमारे इश्क की  तासीर लव स्टोरी कोई पुरानी ह।
कई रँग देखे हमने जिन्दगी में,
कोई न उनसा सच्चा कोई न उनसा धानी।
कह दिया जो था कहना , मेरे सनम ने,
न  कभी की कोई मिलावट न कोई बेइमानी।

अंजू दीक्षित,
बदायूँ,उत्तर प्रदेश।