सुन सखी सुन ना,
अरे क्या बताऊं सखी ?
पेट में दर्द हुआ भारी ,
किससे कहूं कोई सुने ना .
मेरे दिल की बात?
साजन तो सो गए,
करवट बदल के आज।
पेट में दर्द हुआ भारी।
सुन सखी सुन ना,
सारी रात करवट बदलूं।
अपने दिल की बात किसे बतलाऊं ?
पेट में गड़बड़ हो रही भारी,
बात पचे ना मुझसे,
अब तो किसे बताऊं?
सुन सखी सुन ना।
सोच रही तुझको बतला कर ,
पेट दर्द में कम कर लूं।
पर तू आगे मत कहना किसी से,
यह वचन में तुझसे भरवालूं ।
सुन सखी सुनना।
तुझ से कह रही बात सखी,
तू है मेरी प्यारी सखी।।
दिल की कलम से
मधु अरोड़ा

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