तुमसे कितनी है चाहत ओ मेरे सनम, 
अब न होता  सबर में बता दूँ तुम्हे|

देखो कितनी मोहब्बत है तुमसे हमें, 
दिल धड़कता है हरदम ये बेचैन मन, 
तुमसे कितनी है चाहत ओ मेरे सनम, 
अब न होता सबर में बता दूँ तुम्हें|

हो गया है गिला कोई हमसे अगर, 
भूल जाओ गिले माफ कर दो हमें, 
दिल मिलने को तुमसे तरसता है अब, 
ये फासलों को मिटाने का कर लो जतन|

तुमसे कितनी है चाहत ओ मेरे सनम, 
अब न होता सबर में बता दूँ तुम्हें|

क्यों रूठी हो हमसे क्या है मेरी खता, 
पास आओ मेरे और बता दो हमें, 
रह न पाउंगा अब में तुम्हारे बिना, 
करीब आओ मेरे और लगा लो गले, 
हो जाये मेरे दिल का तेरे दिल से मिलन |

तुमसे कितनी है चाहत ओ मेरे सनम, 
अब न होता सबर में बता दूँ तुम्हें|
                   हनुमान कुमार