हम सबके आदर्श,सच्चे नायक,
हमारे मिल्खा सिंह।
हवा भी धीमी लगती थी,
जब तुम दौड़ते थे,
दुनिया दंग रह जाती,
जब तुम अपना रंग दिखाते,
हम सबके प्यारे मिल्खा सिंह।
दौड़ लगाना हमे सिखाया,
दुनिया को है कैसे जीतना,
ये हमे बतलाया,हारना तुम्हें आता नही था,
जीत के सिवा तुम्हें कुछ भाता नहीं था,
जिंदगी के असली नायक तुम हो।
जब तक दुनिया है तुम जिंदा रहोगे,
हमारे जीवन में जोश भरते रहोगे।
तुम जैसा फ्लाइंग सिख इस धरती पर
अब फिर न पैदा होगा कभी,
याद करेगा हर इंसान तुम्हारे संघर्ष को,
तुम प्रेरणा हो जन जन की।
तुम इस देश की आन, बान,शान और अभिमान हो मिल्खा सिंह।
आप को कोटि कोटि नमन।
हरप्रीत कौर
शाहदरा, दिल्ली

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