चक्र समय का चलता है ,
रोज इतिहास बदलता है ।
आंधी तूफान बरसता है ,
कहींआदमी सिसकता है
चक्र समय का चलता है ।,
कठिनाइयों क दौर आज है ,
मन ,आकुल ,बेचैन बड़ा है।
वक्त पर ना कोई जोर है ,
इसकी गति का ना कोई छोर है ।
चक्र समय का चलता है ।
रुकने से नहीं रुकता है ,
अबाध गति से चलता है।
इसका तुम सम्मान करो,
इसको ना बर्बाद करो।
जिसने इसको पहचाना है,
इस की कद्र को जाना है ।
नाम किया जग में रोशन ,
उनको लोगों ने पहचाना ,
चक्र समय का चलता है ।
ना किसी के रोके रुकता है।।
दिल की कलम से
मधु अरोड़ा

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