"पहली नजरों का हम पर हुआ है असर।
मदहोश हो गये हम, मन को नहींं है सबर।।
शब्दों का रस घुला है कानों में मेरे जब से।
मौसम की मार मुझपर लगती है बेअसर।।
ये वक्त गुजरता है और हम ठहर गए हैं।
होश आया तेरे जाने की जब मिली है खबर।।
आलम हुआ है ऐसा, हंसता ज़माना है मुझ पर।
जिस ओर देखती हूँ आता है बस तूं नज़र।।
तस्वीर को मैंने तेरी आइना बनाई है।
तुझे देखने की लत में, खोई हूँ इस कदर।।
ख्वाबों में मेरे जबसे तुम आने लगे प्रियतम।
तन्हाई में ही अब होती है मेरी गुजर बसर।।"
अम्बिका झा ✍️

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