देखते देखते रात ढल जाएगी
तुम सितारों से शिकवा ना करना कभी
चांदनी रात से क्यों शिकायत करें
रात के बाद फिर एक सुबह आएगी !
अपने दर्द की कभी तू नुमाइश ना कर
जानते हैं सभी ज़िंदगी का सबब,
कोई बचता नहीं ,वक्त की मार से
ज़िंदगी की महक ,फिर करीब आएगी!!
अपने सपनों से सदा तू वादा ये कर
रात को जाग कर तुझको देखा अगर,
नींद में डूब कर क्यों तुझको जाया करें
बात ये ख्वाब की ,हकीक़त बन जाएगी!!
हौसलों से ही है,अपनी दुनिया बनी
कोशिशों को कभी हमने रोका नहीं,
खींच लें ये कदम किसकी जुर्रत यहां
हमने खुद ही बनाई अपनी किस्मत नई !!!!
किसी अनजान से कभी मिलना पड़े
अपने दिल को कभी तू धड़कने ना दे,
रफ्ता रफ्ता तुझे इश्क हो जाएगा
फिर इंतजार की,सदी इक आएगी !!!!
कीर्ति चौरसिया
जबलपुर ( मध्य प्रदेश)

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