सूने पड़े हैं गलियारे
सूनी पड़ी है गढ़ हवेलियां 
नहीं सुनाई देती आंगन में राजकुमारों की किलकारी
धूलधूसरित बेरंग सी पड़ी है पिचकारी
नहीं होती अब यहां घुड़सवारी
कभी रोशन था सारा जहां बुझी हुई है अब यहां मशाले
अब यहां कोई नहीं रहता 
रहते हैं निशाचर चमगादड़ काले काले
जहां देखो वहां मकड़ी के जाले
टूटे फ़ूटे दरवाजों पर जड़े हैं जंग भरे ताले।
टूटे फ़ूटे दरवाजों पर जड़े हैं जंग भरे ताले।

कभी नाचती थी अप्सराएं संगीत से महकती थी सारी फिजाएं
कभी सजती थी महफिलें यहां जाम से जाम टकराया करता था।
रूठी हुई रानियों को राजा हाथ जोड़ मनाया करता था।
बड़ी बड़ी मूंछों को ताव दे राजा धाक जमाया करता था
कभी बनती थी रसोई यहां मिलते थे भूखों को निवाले
अब यहां कोई नहीं रहता 
रहते हैं निशाचर चमगादड़ काले काले
जहां देखो वहां मकड़ी के जाले।
टूटे फ़ूटे दरवाजों पर जड़े  हैं जंग भरे ताले।।
टूटे फ़ूटे दरवाजों पर जड़े  हैं जंग भरे ताले।।

राजा की एक हूंकार से क्या मंत्री क्या प्रजा 
दुश्मन ही नहीं शेर भी माॅंद में घुस जाया करते थे
लहराता था हरदम जीत का परचम यहां
कभी दुध पीते बच्चे भी यहां तलवार चलाया करते थे
नादान उम्र में बन जाते थे राजकुमार जनता के रखवाले
अब यहां कोई नहीं रहता 
रहते हैं निशाचर चमगादड़ काले काले
जहां देखो वहां मकड़ी के जाले।
टूटे फ़ूटे दरवाजों पर जड़े  हैं जंग भरे ताले।।
टूटे फ़ूटे दरवाजों पर जड़े हैं जंग भरे ताले।।

रानियां भी यहां जौहर की ज्वाला जलाया करती थी
ले खडग दुश्मन के खून से होली खेला करती थी
झुकना नहीं था कभी मंजुर चाहे तन से धड़ हो जाए दूर
वीरता के रस से सजी रहती थी प्यार प्रेम की फुलवारी 
युद्ध के मैदान में एक नारी थी यहां सब पर भारी
रात में ही नहीं दिन में भी थे यहां खुशीयों के उजाले
अब यहां कोई नहीं रहता 
रहते हैं निशाचर चमगादड़ काले काले
जहां देखो वहां मकड़ी के जाले।
टूटे फ़ूटे दरवाजों पर जड़े हैं जंग भरे ताले।।
टूटे फ़ूटे दरवाजों पर जड़े हैं जंग भरे ताले।।


पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏💐💐