🌷तेरे दिल के लिफ़ाफ़े में अटकीं पड़ी 
जो इस दिल की अर्जी है....🍁

🌷आती है जो लबों पर तेरी याद बनकर
अब तो मुस्कान भी वो फर्जी है....🍁

🌷मैंने तो कर दिया है खुद को तेरे हवाले
तूँ आबाद कर या बरबाद कर दे, अब तो ये तेरी मर्जी है....🍁

🌷बनाकर मुझे अपना वो ख्वाब किसी ओर का बुनता है
ये कैसी तेरी मौहब्बत या तेरी खुदगर्जी है....🍁



            कु.आरती सिरसाट
          बुरहानपुर मध्यप्रदेश