नमस्कार दोस्तों मैं पिंकी मिश्रा भागलपुर बिहार से एक उपन्यास प्रारंभ कर रही हूं जिसका शीर्षक है -



" राशि एक नृत्यांगना" भाग - 1


राज्य स्तर पर होने वाले नृत्य प्रतियोगिता का आज रिजल्ट आया था , जिसमें 12 वर्षों से नृत्य छोड़ चुकी राशि ने भी भाग लिया है ! अखबार के पहले पृष्ठ पर अपनी तस्वीर देखकर राशि फूली नहीं समा रही है ! वह बहुत खुश है क्योंकि उसे पहला स्थान प्राप्त हुआ है! अखबार देखकर सभी दोस्त रिश्तेदार बधाइयां दे रहे हैं ! हर्ष राशि का पति शहर से बाहर गया है ! राशि बड़ी उत्सुक होकर हर्ष का इंतेजार कर रही है ! सुबह से ही अच्छे अच्छे खाने बनाकर पूरे घर को सजाने में लगी थी कि हर्ष को कोई शिकायत का मौका ना मिले ! उसकी हमेशा शिकायत रहती है कि क्या करती हो दिन भर घर में जो घर इतना बिखरा रहता है , वह कई बार सफाई दे चुकी है-

" बच्चे छोटे हैं मैं सफाई करती हूं वह समझते नहीं सामान इधर-उधर बिखेर देते हैं ! "

जब भी वह ऐसा कहती हर्ष और तेवर में ,

कहता- " बच्चे हैं तो गंदा  करेंगे ही तुम्हारा काम है साफ रखना ! "

उसके गुस्से और तेवर से राशि को बहुत तकलीफ होती है ! पर वह दो बूंद आंसू गिरा कर फिर से सब काम करने में लग जाती है ! राशि ने शादी के बाद से नृत्य करना छोड़ दिया था और घर गृहरस्ती में रम गई थी ! वह तो ऐसा ही कहती है सब से कि बच्चे छोटे हैं, फुर्सत नहीं मिलती इसलिए मैं नृत्य नहीं कर पाती ! परन्तु सत्य यह है कि हर्ष को राशि का नृत्य करना बिल्कुल पसंद नहीं ! जिस नृत्य की वजह से हर्ष ने राशि से विवाह किया था वही नृत्य आज उसे नागवार है क्योंकि वह रोज-रोज की राशि की उपलब्धियां बर्दाश्त नहीं कर पाता है ! उसके अंदर का मेन इगो उसे राशि पर अंकुश लगाने  के लिए विवश करता और वह अभिमान में दिन प्रतिदिन राशि पर पाबंदियां लगाता चला गया ! कब राशि अपनी राज्य की शान शास्त्रीय नृत्यांगना से एक आम गृहिणी बन गई उसे भी पता नहीं चला ! इस बार भी कहां आसान था राशि का इस प्रतियोगिता में भाग लेना ! बहुत मुश्किल से महीनों की मान मनौव्वल के बाद हर्ष ने उसे फॉर्म भरने दिया  !  और साथ में मुस्कुराकर तंज कस रहा था !
" अब तुम क्या नृत्य कर पाओगी ! अपना वजन देखो बिल्कुल भैंस हो गई हो ,  घर में बैठे-बैठे खाती हो तो क्या होगा ,काम तो तुमसे कुछ होता नहीं , फिर भी तुम्हारी बहुत इच्छा है तो भर लो फॉर्म ! होना जाना कुछ नहीं है ! बस समय की बर्बादी होगी ! जितना वक्त तुम अपने सपने बुनने में लगाती हो ! उसका आधा भी वक्त बच्चों को दे दिया होता ,तो बच्चे नंबर वन रैंक लाते ! पर मैं तुम्हें यह सब क्यों समझा रहा हूं तुम तो 12 वर्षों में भी यह बात ही नहीं समझ पाई तो आज क्या समझोगी !जाओ और जो मन में आए करो !"

कहकर हर्ष 2 महीने के लिए ऑफिस के काम से बेंगलुरु चला गया  ! राशि फॉर्म भर कर घर के सारे काम निपटा कर बड़े आराम से प्रैक्टिस कर लेती ! बच्चों को भी संभाल लेती ! सिर्फ एक हर्ष के नहीं होने से लगता जैसे घर में कोई काम ही नहीं है ! सब काम समय पर हो जाता और उसे पूरा समय मिल जाए मिल रहा ताकि वह बेहतर प्रदर्शन कर सके ! 1 महीने पहले ही नृत्य प्रतियोगिता हुआ था ! आज रिजल्ट आया है ! वर्षों के अंतराल के बावजूद राशि ने खुद को साबित किया है इसलिए सब लोग खुश हैं ! सब  के सब बधाइयां दे रहे हैं ! सिर्फ अभी तक हर्ष का कॉल नहीं आया है! उसे लगा हर्ष ने मोबाइल नहीं देखा होगा, बेंगलुरु में कहां आते  हैं यह अखबार !  हर्ष की नाराजगी ना सहनी पड़े इसलिए सुबह से वह घर को सजा संवार रही है ! हर्ष की पसंद के व्यंजन बना रही है ! जब खा पीकर वो शांत होगा तब  मैं अपनी उपलब्धि उसे दिखाऊंगी ! यही सोच सोच कर यंत्रवत काम में लगी है ! शाम के 5:00 बजे दरवाजे की घंटी बजती है ! वह दौड़ कर जाती है ! दरवाजा खोलती है ! हर्ष को देखकर खुश हो जाती है ! उसके हाथ से बैग लेती है ! हर्ष सोफे पर बैठ जाता है ! वह जल्दी से किचन से पानी चाय लेने चली जाती है ! हर्ष पानी पीता है चाय पीता है कहता है- "क्या बात है.. आज तो घर बिल्कुल समेटा हुआ है ,बच्चे भी बड़े सलीके से बैठ कर पढ़ाई कर रहे हैं, मैं तो महीने घर से बाहर रहा तो इतना परिवर्तन इस बार 3 महीने के लिए चला जाऊंगा ! तो लगता है कुछ और अच्छा देखने को मिल जाए ! और फिर राशि को देखकर एक तंज भरी हंसी हंस देता है , राशि कुछ नहीं कहती बस पूछती है - "खाना लगा दूं ....." हां.. हां क्यूं नहीं शाम के छः बजे ही खाना लगा दो फिर छुट्टी काम से !"इसके बाद चिढ़ कर कमरे में चला जाता है ! राशि बिना गलती की माफी मांगती है हर्ष को मनाती है और खाना खिलाती है ! और यह सोचकर चुप रह जाती है की आज हर्ष का मूड ठीक नहीं है ! रात में सोएगा थकावट कम हो जाएगी तो सुबह बात करूंगी ! सुबह उठती है नई उम्मीद लेकर लेकिन कुछ नहीं बदलता है  ,न का हर्ष गुस्सा कम होता है ! न वह कुछ कह पाती है !

क्रमशः 
आगे की कहानी पढ़ने के लिए बने रहे मेरे साथ ! जल्दी ही मै इसका दूसरा भाग पेश करूंगी !
......✍️ पिंकी मिश्रा