अनिरुद्ध का स्टडी टूर खत्म हुआ। सभी प्रशिक्षणार्थी देहरादून में अपनी अकादमी को लौट आये।दो दिन बाद उनका पासिंग आऊट सेरेमनी और शपथ ग्रहण समारोह हुआ और सभी प्रशिक्षणार्थियों को सर्टिफिकेट प्रदान किये गये। साथ ही उनका पोस्टिंग ऑर्डर्स भी दे दिया गया और उन्हें निर्देश दिया गया कि वे सभी अपने पोस्टिंग स्टेशन में पंद्रह दिन बाद रिपोर्ट करें। अनिरुद्ध को कर्नाटक कैडर में पोस्टिंग मिला और उसे शिवमोगा (शिमोगा) फॉरेस्ट सर्किल में ज्वाइन करने का निर्देश दिया गया।
अकादमी से रिलीज होकर वह अपने घर दिल्ली आ गया। उसे पंद्रह दिन बाद ड्यूटी ज्वाइन करना था। अनिरुद्ध के पिताजी भानुप्रताप वर्मा दिल्ली वन विभाग में कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स के पद पर हैं। अनिरुद्घ ने स्टडी टूर के दौरान उड़ीसा के जाजपुर में और ऋषिकेश में घटित घटनाओं को अपने माता- पिता को बताया। उसके पिता ऐसी बातों में रुचि नहीं रखते थे पर वे भी सोचने को मजबूर हो गये कि यह क्या माजरा है। उसकी माता रामदुलारी देवी शिवजी की अनन्य भक्त थी। उसे विश्वास था कि कोई महत्वपूर्ण घटना घटनेवाली है।
एक दिन भानुप्रताप को अपने पुराने मित्र चन्द्रभान कश्यप का बैंगलोर से फोन आया। भानुप्रताप और चन्द्रभान एक ही साथ आईआईसी, बंगलौर में वनस्पति शास्त्र में एमएससी की पढ़ाई की थी। पढ़ाई के बाद चन्द्रभान अपने पिता के विशाल कारोबार को संभाल लिया ,वहीं भानुप्रताप आईएफएस की परीक्षा देकर फॉरेरेस्ट रेंजर बन गया था। अब चन्द्रभान उद्योग- जगत में एक बहुत बड़े उद्योगपति हैं और भानुप्रताप दिल्ली वन विभाग में कन्जर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स हैं। चंद्रभान कश्यप की बेटी प्रियंवदा आईआईसी ,बंगलौर में वनस्पति शास्त्र में एमएससी की पढ़ाई कर रही है और भानुप्रताप का बेटा आईएफसी अफसर बन गया है।
चंद्रभान ने अपने मित्र भानुप्रताप से अपनी बेटी प्रियंवदा की परिस्थिति की जानकारी दी। उन्होंने प्रियंवदा को अक्सर आनेवाले सपनों के बारे में बताया। उन्होंने यह भी बताया कि कई बड़े मनोचिकित्सकों को दिखाया पर उन्होंने उसे पूर्ण स्वस्थ बताया। अंत में उन्होंने बीहड़ जंगलों वाली उस भैरवघाटी की बात बताई और पूछा कि ऐसा कोई भैरवघाटी नाम का कोई जंगलों की घाटी वास्तव में कहीं है ।
भानुप्रताप ने कहाँ कि उनकी जानकारी के अनुसार ऐसी कोई घाटी नहीं है। फिर उन्होंने अपने बेटे के साथ उड़ीसा और ऋषिकेश में हुई घटनाओं का वर्णन किया। दोनों ही मित्र असमंजस में थे कि उनके संतान के साथ ये कैसी घटनाएं हो रही हैं!
अपने घर में अनिरुद्ध का एक सप्ताह गुजर गया। एक रात उसे सपने में स्वामी स्वरूपानंद दिखाई दिये। उन्होंने स्वप्न में कहा-"वत्स , जिस महान कार्य के लिये तुम्हारा जन्म हुआ है, वह कार्य करने का समय आ गया है। तुम कल ही रवाना होकर जाजपुर विरजा मंदिर आ जाओ। वहाँ मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा।" अनिरुद्ध की आंखें खुली तो वह सामने स्वामीजी को पास में खड़ा पाया। क्षण भर में वे अंतर्ध्यान हो गये। अनिरूद्ध चकित -सा देखता रह गया।
उसी रात अनिरुद्ध की माँ रामदुलारी देवी को स्वप्न में शंकर भगवान के दर्शन हुये। सपने में शिवजी ने कहा-" कलिंग देश में वैतरिणी नदी के तट पर विरजाक्षेत्र शक्तिपीठ है । वहाँ गौरी विरजा नाम से विराजती है। तुम अपने परिवार के साथ वहाँ जाओ। परसों अष्टमी के दिन वहाँ शरद् नवरात्रि की पूजा आरंभ होगी। उस दिन देवी के दर्शन करो। वहाँ एक अद्भुत घटना की तुम साक्षी होगी।" इतना कहकर शिवजी अंतर्धान हो गये।
सुबह उठकर उसने देखा कि अनिरुद्ध अपने कपड़े ,सामान वगैरह पैक.कर रहा था। माँ के पूछने पर उसने रात के सपने की बात बताई। अनिरुद्घ की माँ भी अपने सपने की बात बताई। भानुप्रताप को पहली बार अहसास हुआ कि यह सब विधाता की लीला है। उन्होंने उसी दिन के भुवनेश्वर फ्लाइट में तीन टिकट बुक किये। शाम होते ही वे भुवनेश्वर पहुंच गये। उस रात सर्किट हाउस में रहकर दूसरे दिन भोर चार बजे फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की जीप से वे जाजपुर के लिये निकल पड़े। सुबह साढ़े छह बजे वे विरजाक्षेत्र में थे। वहाँ सर्किट हाउस में अपने सामान वगैरह रखकर वे विरजा मंदिर के लिये निकले। पवित्र वैतरिणी नदी में स्नान कर अनिरुद्ध और उसके माता पिता तीनों विरजा मंदिर पहुंचे।
(शेष अगले भाग में)

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