भारत की संस्कृति
जिस देश में ममता समता है
गंगा का पानी ना जमता हैं
करता नित वंदन सागर भी
श्रीराम प्रभु का चंदन हो
रेतीले टीले लहराती पवन
बरसाती सजन आया सावन
भाई और बहन का वंदन हो
गुरुदेव का भी अभिनंदन हो
गाय को माता कहते है
हनुमान भी संग में रहते है
नागों की जहाँ पर पूजा हो
विष भी अमृत में बदलता है
मीरा के जैसी भक्ति है
पन्ना के जैसी शक्ति है
करके बलिदान जो जीवन का
नाम कराया धरती का
नल निल की जैसी माया हो
सत पर ही टिक पाया हो
राजा ने त्यागा राज जहाँ
ऐसा बलिदानी राजा कहां माता पिता की छाया हो
बसती जिसमें काया हो
भेद न कोई करता हो
एक दूजे के संग में मरता हो
देश धर्म नारी शक्ति
लक्ष्मी का रूप समझता हो
संध्या पंवार

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