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तेरे होठों को छूते ही
मैं शराबी हो गया
तेरे सोहबत में आते 
ही नमाज़ी हो गया

पहली नजर से ही तुझसे 
मुहब्बत होने लगा था
दिल न चाहते हुए भी 
तुझपे मरने लगा था
अब कैसे बताऊं मैं 
तेरा आदि हो गया

निंद आती है पर तू 
सोने नही देती
ख्वाब किसी और का 
जो देखूं देखने नही देती
दिल धड़कना चाहे 
किसी और के लिए
तू धड़कने नही देती
अब कैसे बताऊं मुझपे 
तेरा काबू हो गया

मैं चाहे जिस राह पे चलु 
मंजिल तू ही होती है
मैं चाहे किसी और को 
देखूं नज़र में तू ही होती है
सांसें जो लूं खुद का 
खुशबू तेरी ही होती है
अब कैसे बताऊं मुझपे
तेरा जादू हो गया

तेरी मेरी मुहब्बत देखकर
कोई कायल हो गया
कोई घायल हो गया
और रब भी राज़ी हो 
गया राज़ी हो गया

अफ्फान हाजिपुरी ✍️
सर्वाधिकार सुरक्षित

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