किसी का आचरण
करता उसके पूरे अस्तित्व की व्याख्या है
 
यदि वह प्रेम दर्शाता है 
तो ये न समझना
वह शक्तिहीन है 

मानव कभी अशक्त नहीं
वो तो बस असंख्य रिश्तों 
में विलीन है ।।

यही घुलनशीलता ही
मानव सहन शक्ति की परिभाषा है

गृहस्वामिनी बन
जो नारी बनती
कोमलता का उदाहरण

तो पुरुष करता 
परिवार रक्षित करने हेतु
सामर्थ्य बल को धारण

इसी निमित्त संसार चलता
यही आचरण शिव शक्ति की संवाद भाषा है
                         
  मौलिक व स्वरचित                                 --  कीर्ति रश्मि "नन्द
        वाराणसी