कृषि की महिमा की क्या बात है।
कृषि से उज्जवल दिन रात है।
जब दाऊ ने हल चलाया।
स्वर्ग सा सुंदर इंद्रप्रस्थ बनाया।
दुष्ट दुर्योधन का हृदय जलाया।
जब विदेह ने हल चलाया।
लक्ष्मी अवतार सीता को पाया।
जिसने श्रीराम का संग निभाया।
खेतिहर,परिश्रमी सिंधुपुत्रों ने,
मोहनजोदाड़ो संपन्न बसाया।
आर्यों ने छीना अनार्यों का भू,
कृषक बन नई सभ्यता बसाया।
सरस्वती तीरे ऋगवेद रचाया।
बिनोवा भावे ने भूदान चलाया।
निर्धनों को भूमिवान बनाया।
कृषि का संतुलन बनाया।
धेनु झुंड चरा श्रीकृष्ण ने,
गोपाल कहलाने का गौरव पाया।
कृषि की महिमा की क्या बात है।
कृषि से उज्जवल दिन-रात है।