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जिंदगी तुझसे मिलकर
अनमोल रत्न पाया है,
तजुर्बा के सागर में---
अनुभव रूपी मोतियों के
बेशकीमती उपहार को सजाया है,
दुख रूपी धूप में---
सुख रुपी छांव के
एहसासों का लुत्फ उठाया है,
पग पग पर ठोकर दी है---
लेकिन उठना भी तो तूने ही सिखाया है,
जिंदगी तू एक हसीन साया है,
तेरे आंचल में रहकर प्रत्येक इन्सान---
दुख रूपी तूफान से लड़कर
सुख रुपी लहरो की महत्ता को समझ पाया है।

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