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आसमान से बरसती ये बारिश की बुँदे जब फूलो को भीगाती हैं
जब जब बहती ये पुरवा पवन मेरी आँचल को लहराती हैं
जैसे पिगल जाती हैं बुँदे गिरते ही मेरी हथेली में
सनम तेरे याद में हमारी दिल तड़प जाती हैं
क्यूँ सिर्फ हवाओ से पूछा करते हो खैरियत मेरी
या कभी भी तुम्हे याद ही नहीं सताती हैं मेरी
क्यूँ करते हो जनाब अपने जान पर ही यूँ सितम
सनम तेरे इन सितम से मेरी जी जल जाया करती हैं
कभी कभी लगता हैं मैं ही क्यूँ ना बादल बन जाऊ
जो तुम निकलो अपने छत पर बारिश बन तुझपे बरस जाऊ
या बनजाउ वो बहती हवा जो तुझसे होकर गुजरती हैं
की सनम तेरे याद में हमारी दिल तड़प जाती हैं
क्यूँ नहीं समझते हो हाले दिल ईस दीवानी की
क्यूँ बने हो बेखबर ना सुनते हो अपने दिल की भी
ऐसा भी क्या तरसाना परदेशी अब कुछ बोल भी दो
सनम तेरी ये खामोशी हमारी जान ले जारही हैं
एक तो इन बादलो का साज़िश और ये बहती हवा
खेलती हैं संग तेरे मेरी इन खुली ज़ुल्फो से नैनो में आजाती हैं हया
ऐ खुदा हैं भी क्या कही ईस दिल के रोग की कोई दवा तो बतादो
की कैसे सुनाऊ उस बेपरवाह सनम को मेरे दिल ने लिखी जो तराने हैं
ऐ मौसम-ए-बहार तुम मेरी एक काम करदो
उड़ कर जाओ मेरी सनम के गली उन्हें छूकर मेरी अहसास करदो
देखना वो अपनी छत पर खड़े चाँद को देख रहे होंगे मुस्कान लिए
लेकिन सम्भल कर देखना बड़े भोले सनम हैं किसी की भी नज़र लग जाती हैं
दिल में क्या हैं उनकी वो बात पढ़ के आना
क्या वो तड़प रहे मेरे याद में ये भी बता जाना
क्या मज़बूरी हैं जो आते नहीं मेरी चाँद मेरी गली में
कहना उनसे की नैना अपनी सनम की एक झलक पाने को तरस जाती हैं
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नैना..✍️✍️💞💞

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