आदित्य सा जब पाँच साल के थे, तभी उनकी माँ सा का देहांत हो गया था। वो दाई माँ के हाथो पले बढे।बाबा सा से आदित्य सा छोटे से ही  बहुत डरते थे।बाबा सा शुरु से बहुत अनुशासन के साथ रहते थे। वो बहुत सख्ती से पेश आते थे। आदित्य सा की ,माँ  के जाने के बाद वो भी बहुत टूट गए थे। जिस कारण से ना तो वो अपने बेटे को माँ का , ना ही पिता का प्यार दे पाएँ।जब तक बाबा सा को अहसास हुआ कि वो अपने बेटे के संग गलत कर रहे है , तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इसी कारण से बाप बेटे मे फासले आ गए।

उचित परवरिश और प्यार न मिलने के कारण आदित्य सा बचपन से ही जिद्दी और गुस्सैल थे। वो हर चीज को जबर्दस्ती हासिल करना चाहते थे। हवेली मे प्रत्येक सेवक उनसे बहुत डरता था। उनके चीजो को कोई हाथ लगा दे ये उनको बिल्कुल पसंद नहीं था। उनका कमरे की भी  मै ही साफ सफाई किया करती थी। 

वो बचपन से ही पढने मे बहुत होशियार थे।  वो जब भी बाबा सा से पैसे माँगते। वो उनसे डीटेल माँगते जिससे उन्हें बहुत चिढ़ होती इसलिए वो पढ लिखकर खूब शौहरत और पैसा कमाना चाहते थे ताकि उन्हें कभी किसी के सामने हाथ ना फैलाना पड़े। 

देखते ही देखते वो अपनी मेहनत से वो बहुत बड़े उद्योगपति बन जाते है।  बड़े बड़े रईसो के साथ उठना बैठना, शराब पीना,कई कई रातो तक घर नहीं आते थे। बाबा सा उन्हें समझाते , तो भी वह उनकी बात नहीं सुनते थे।


एक ही छत के नीचे रहते हुए भी बाप बेटे के बीच  मे ना के बराबर बात होती थी। इसलिए जब भी आदित्य सा को बाबा सा की  मदद चाहिए होती वो अपने चाचा सा बोलकर अपना काम निकलवा लेते थे।

बाबा सा अपने बेटे की मेहनत और कामयाबी देखकर बहुत खुश होते है। मगर आपसी मतभेद होने की वजह से एकदूसरे से अपनी खुशी जता नहीं पाते है।
लेकिन अपने बेटे की गलत हरकतों को देखकर बहुत दुखी भी होते है। 

आदित्य सा ने वंशिका बहुरानी की सुंदरता देखकर उनसे ब्याह तो कर लिया। मगर वंशिका बहु मिडिल क्लास के परिवार से आई थी और राजघराने के तौर तरीके से अंजान थी।

आदित्य सा वंशिका बहु से प्यार बहुत करते थे। मगर उनकी बेइज्जती करने मे कसर भी नहीं छोड़ते थे। अगर हवेली मे किसी सेवक से या महाराज से हँसकर बात भी कर लेती ,तो उन्हें गुस्से से थप्पड़ जड़ देते।यह कहकर ऊँचे घराने के बहुएँ छोटे लोगो के साथ दाँत चिंघाड़ कर हँसा नहीं करती। 

वंशिका बहु जब भी आदित्य सा को देखती डर कर सहम जाती। उसके पास जाने के नाम से भी पसीने टपकने लग जाते। थरथर काँपने लगती। मगर पत्नी होने के नाते पत्नी के फर्ज निभाने भी पड़ते।  

शायद ही कोई पत्नी ऐसी होगी जो पति के घर मे नहीं रहने से खुश होती होगी। लेकिन वंशिका बहु के केस मे उल्टा था जब आदित्य सा काम के.सिलसिले मे जब भी बाहर जाते वंशिका बहु बहुत खुश रहा करती । 

बाबा सा और वंशिका बहु अधिकतम एक साथ ही डाईनिंग टेबल पर खाना खाया करते थे। शुरु शुरू मे वंशिका बहु हाथ से ही खाना खाती थी। लेकिन बाबा सा वंशिका को धीरे धीरे सारे टेबल मैनर्स सिखा देते है।

ससुर बहु की खूब पटती है।लेकिन वंशिका बहु कभी आदित्य सा की कभी कोई शिकायत नहीं करती। ऐसे तो हवेली मे कोई काम नहीं था। सब काम के लिए सेवक सेविकाएँ थे। लेकिन वंशिका बहु को खाना बनाने का बहुत शौक था। वो कभी कभार बाबा सा के लिए बाजरा की खिचड़ी बनाया करती थी। बाबा सा.जब भी खाते , बोलते तेरे हाथ मे वैसा ही स्वाद आता है, जैसे आदित्य की माँ बनाकर खिलाया करती।

वंशिका बहु ज्यादा पढी लिखी तो नहीं थी। मगर वो रामायण की चौपाईयाँ ,गीता जी पढकर बाबा सा को खूब मधुर आवाज मे और लय मे सुनाया करती। 
सारे सेवक सेविकाएँ सारे  काम छोड़कर सुनने मे लग जाते और खत्म होते ही बहुरानी की खूब तारीफ किया करते।

वंशिका बहु बहुत ही कम समय मे बाबा सा का दिल जीत लेती है। वो हमेशा कहा करते थे ,अपने जीवन मे आदित्य ने एक काम बहुत अच्छा किया , ऐसी लड़की को अपनी जीवनसंगिनी चुना है जो की सुंंदर होने के साथ साथ गुणवाण भी है। और मुझे पूरी उम्मीद है कि वो मेरे बेटे को सही राह पर जरूर ले आएगी। 

ये हवेली जो इतने दिनो से सूनी सूनी लगती थी। बहुरानी के हवेली  मे आते ही रौनक आ गई है।

एक दिन आदित्य सा वंशिका बहु को पार्टी मे जाने के लिए तैयार होने कहकर जाते है। वंशिका बहु कभी बड़ी बड़ी पार्टियों मे गई हुई नहीं रहती है। पहली बार वो आदित्य के साथ कही जा रही थी तो वो बहुत प्रसन्न भी थी। मगर  वो थोड़ी कंफ्यूज थी , आखिर वो क्या पहन कर जाए। वो सारे कपड़े अलमारी मे से निकालकर बिस्तर पर फैला देती है। फिर वो बेल बजाती है। सेवक आकर "खम्मा घणी" कहकर
" पूछता है जी बहुरानी सा" "हुकुम"
वह दृश्या को यानी की मुझे भेजने को कहती है। मै जाकर देखकर हूँ , जी बहुरानी बोलिए 

अरे सखी क्या बोलु , आज मुझे उनके संग पार्टी मे जाना है। तू बता मै के पहन कर जाऊँ ?? मने तो कुछ समझ म नहीं आ रहे है , वो बहुत मासूमियत से बोलती है। उनका चेहरा खुशी से दमक रहा था। दोनो मिलकर कपड़े पसंद करते है। मै उन्हें तैयार होने बोलती हूँ और खुद सारे कपड़े  जल्दी से अलमारी मे उठाकर रखती हूँ।


वंशिका बहु राजेस्थान के पारंम्परिक कपड़े पहनकर तैयार हो जाती है। वो अत्यधिक.खूबसूरत और प्यारी लग रही थी। कही उनको किसी की नजर न लग जाए इसलिए मैं काजल लेकर उनके कान के पीछे लगा देती हूँ। वो तैयार होकर आदित्य सा के आने का इंतजार करने लगती है।

क्रमशः