( उस गँवार के टॉपर होने की बात से हर कोई हैरानी से आराधना को देख रहा है, सपना को भी विश्वास नहीं होता है की जो लड़की इतनी डरी सहमी सी रहती है, लड़कों के सामने चुप रह जाती है वह इतनी प्रतिभावान है, अब उसे भी अपनी नई - नई दोस्ती पर गर्व महसूस हो रहा था|)
सपना- यार, तुने मुझे बताया ही नहीं तुम ही वो आराधना हो,( मोहित को देखते हुए) नहीं तो आजकल कुछ लोग कुछ नहीं होने पर भी हवा में उड़ने लगते है| आज से मैं तुम्हारे साथ ही रहुँगी.....
मोहित- हाँ, चिपकु बन्दरिया जो हो, शहद के पास मक्खी भिनभिनाती रहती है ना.....
किशोर- अच्छा तो अब आराधना गँवार से शहद हो गई है क्या....?
मोहित- नहीं तो मैंने ऐसा तो नहीं कहा, वो देख उस तरफ चलते है रीतु मैडम आ रही है उनसे पूछते है कल के प्रोग्राम के बारे में|
(मोहित किशोर का हाथ पकड़कर उसे अपने साथ ले जाता है, उधर आराधना अभी भी खुद को असहज महसूस कर रही है, वो मन ही मन सोचती है वह लड़का था कौन, और वह हमसे इतनी नफरत से बात क्यों करता है, हमने तो उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ा|)
(मोहित और किशोर रीतु मैडम के पास जाते है,और उनसे कल होने वाले प्रोग्राम के बारे में बात करते है....)
मोहित- मैडम, आपको पता है कल हमारे विद्यालय में जिला कलेक्टर सुनीता पंवार आने वाली है, पूरे विद्यालय में उनके स्वागत की तैयारी चल रही है हम लोगों के लिए कोई भी काम हो तो जरुर कहना|
रीतु- अरे नहीं मोहित बाकी कामों के लिए सब है ना पर एक काम है जिसके लिए मैं अभी तुम्हारे पास ही आ रही थी| कलेक्टर साहिबा जब हमारे विद्यालय में आऐ तो तुम उनको माला पहनाकर स्वागत करोगे, और उनके सम्मान में कुछ पंक्तियां भी कह सको तो उनको अच्छा लगेगा, आखिर हमारे विद्यालय के ट्रस्टी के बेटे हो तुम|
किशोर- जी, बिल्कुल ठीक कहा आपने मैडम अपना मोहित तो वैसे भी इस विद्यालय का सबसे प्रिय विद्यार्थी है, हम समय से पहुँच जाएंगे, चल मोहित कल की तैयारी करते है....
( दोनों का प्रस्थान, रीतु मैडम आराधना के पास जाती है |)
रीतु- सुनो आराधना, कल विद्यालय में कलेक्टर मैडम आएगी तो प्रिंसिपल सर चाहते है तुम उनके स्वागत में वहाँ उपस्थित रहो, और तिलक लगाकर उनकी आरती करो, उसके बाद तुम्हारा एक भाषण भी होगा तो तैयार रहना|
आराधना- पर मैडम, मैं.... मेरा मतलब मुझसे कैसे हो पाएगा.... मेरी जगह सपना चली जाएगी....
रीतु- ( गुस्से में) तुमको देखकर कौन कह सकता है की तुम जिले में प्रथम आई हो, कितनी डरपोक हो तुम| प्रिंसिपल सर ने साफ कहा है कि तुम ही उनके स्वागत के लिए आगे रहोगी, तो कल समय पर पहुँच जाना|
सपना- जी मैडम यह जरुर आएगी, आप चिंता ना करें|
( रीतु मैडम वहाँ से चली जाती है| आराधना और सपना भाषण की तैयारी में जुट जाती है| कुछ समय बाद आराधना कलेक्टर के जीवन की महत्वपूर्ण बातों का पता लगाकर बहुत ही अच्छा भाषण लिखकर तैयार करती है, परन्तु नये विद्यालय और कलेक्टर मैडम के सामने जाकर बोलने के बारे में सोचकर ही वह घबरा जाती है| )
विद्यालय का दूसरा दिन:-
किशोर- मोहित, तुमने सोचा भी है कि क्या बोलना है आज, सिर्फ माला ही नहीं पहनानी है उनको, तुझे याद है ना मैडम ने कुछ पंक्तियां भी बोलने का कहा था, और एक तुम जिसने कभी एग्जाम में भी किताब को हाथ ना लगाया हो, कॉपी में भी आगे- पीछे वाले बच्चे ही तुम्हारा बेड़ा पार लगाते हैं, अब क्या करोगे तुम?
मोहित- इसकी मुझे कोई टेंशन नहीं है, क्योंकि वो गँवार टॉपर है ना, वह कल कुछ लिख रही थी, कलेक्टर मैडम के लिए, टॉपर रह चुकी है तो कुछ तो ढंग का लिखा होगा उसने, हम लोगों को कैसे भी वह स्पीच चुरानी होगी, फिर आएगा मजा, सबके सामने मैं बनूंगा हीरो, और उस टॉपर की जब बोलती बंद होगी तो उसका चेहरा देखने लायक होगा|
किशोर- यार,फिर वो क्या बोलेगी अगर तु उसकी स्पीच पढ़ देगा तो| बेचारी ऐसे ही डरती है वो इतना.....
मोहित- तभी तो मजा आएगा मेरे भाई, तू बस देखता जा कैसे उस टॉपर की बेइज्जती होती है..... चल लगता है सुनीता जी आ गई|
( नीली बत्ती वाली सफेद गाड़ी में सुनीता जी का आगमन होता है, सभी विद्यार्थी और अध्यापक कक्षाओं से झांक कर उनका चेहरा देखने का प्रयास कर रहे है.....
क्रमश:

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