ए मालिक बता ये तू क्यों चाहता है -
तेरा कोई  बंदा ना हरदम सुखी हों,
कभी ना कभी वो जरूर दुख पाएं!
घिसटते हुए फिर तेरे दर पे आए
वो माथा यूं रगड़े  और फिर गिड़गिड़ाएं !!
तू क्यों चाहता है कि हर कोई यहां पर,
कभी ना कभी किसी अपने को खोए !
तड़फे दुःखों से ना रातों को सोये,
तू पौछेगा आंसू पर पहले वो रोए !!
तू क्यों चाहता है ये लम्बी कतारें,
दुखियों की दुनिया मे बढ़ती ही जाएं !
तू क्यों चाहता है कि  रोते हुए ही,
तेरे दर पे आएं और जयकारा लगाएं !!
तुझसे तो अच्छे वो माता पिता हैं,
जो हरदम ये चाहें कि उनके सब बच्चे !
कभी ना दुखी हों कभी ना वो रोएं,
कभी ना हों वो बीमार भूखे ना सोएं !!
तू क्यों ना ये चाहे कि हर कोई अपनी,
सारी ही खुशियाँ तेरे दर पे मनाएं !
ना हो कोई दुःखिया ना रोता ना भूखा,
फिर भी तेरे दर पे सब खुश हो के आएं !!
कहीं धरती कापें जो भूकंप आए,
कहीं जिंदगियों को कोरोना लील जाए !
क्या ये सब यूं कि कहीं ये सारी दुनिया,
तेरे इस वजूद को भूल ना जाएं !!
अगर ऐसा है तो तू कैसा खुदा है,
बता मेरे नेताओं से तू कैसे जुदा है !!
 सतीश निर्दोष
रेवाड़ी (हरियाणा )