प्यार में तकरार कयी बार होती है।
रूठना मनाना भी कयी बार होता है।
रिश्तों की बारीकी में तकरार जरूरी है।
कुछ खट्टी कुछ मीठी यादें होती है।
अहसास गहराई की परख समझाती।
हाँ रिश्तों में कुछ तकरार जरूरी है।
एक बार नहीं कयी बार तकरार होती है।
पति-पत्नी के प्यार में तकरार होती है।
भाई-बहन के प्यार में मीठी तकरार होती है।
माँ बेटे और बेटी में तकरार होती है।
बातों को उलझाने से तकरार बढती है।
प्यार भरी बातों से तकरार मिटती है।
सौजन्य विनीत व्यवहार से तकरार मिटती है।
रिश्तों की अनुभूति भी तकरार कराती है।
कभी-कभी अपनों से तकरार होती है।।
---अनिता शर्मा झाँसी
---मौलिक रचना

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