नमस्ते आप सबको🙏🙏
  आगे की कहानी सुनाती हूँ..................😊
(पालन-पोषण)   -  जिम्मेदारी भरा समय जहाँ बच्चे की
विशेष परवाह की तैयारी की जाती है।उसके मन को समझना होता है,
बच्चे का रोना स्वभाविक है,अगर ज्यादा रो रहा है तो क्यों
रो रहा है।10 कारण हो सकते हैं,पर माँ को बस 1 कारण
समझना पड़ता है।..........बच्चा क्यों रो रहा है।
     ये होती है जिम्मेदारी एक माँ की। 
रात भर जागना सुबह जल्दी उठना सब आसान सा लगता है। परेशानी तो  होती है, माँ सीता को भी हुई थी परंतु,
सब आंनद पूर्वक हो जाता है।.....................😊
समय के साथ जब बच्चे बड़े होने लगते हैं। जिम्मेदारी
और बढ़ जाती है। कभी तो मन विचलित हो जाता है।
फिर उसकी मासूम भरी बातों से मन आनंदित हो जाता है।
ये वो समय होता है जब माँ सिर्फ बच्चे के बारे में सोचती है,अपनी कोई परवाह नहीं रहती परन्तु बच्चे के भोजन से शयन तक की हमेशा सोचती रहती। माँ बच्चे की परछाई बन के रहती है....................☺
माँ का आँचल औऱ काला टीका बच्चे को हमेशा बुरी नजर से
बचाती है.......।
               इस प्रकार ये सुखद और आनंददायक क्षण
भी गुजर जाता है।............ आज के लिए इतना ही कल
फिर मिलते हैं...............😊
                            ऋचा कर्ण✍