शीतल  बयार बही 
आ गए हैं वो 
सम्मुख जाऊँ कैसे

नीरस जीवन 
मचलता मन
मै बुलाऊँ कैसे 

विचलित यौवन 
झुके नयन 
मै रिझाऊँ कैसे 
 मुकेश लखनवी