सगाई की रस्म और मेहमानों के खाना खाते शाम हो गई । स्वाति ने भी शिवांश को खाना खिलाकर अपनी मां के पास सुला दिया और खुद कपड़े बदल कर होटल से बाहर थोड़ी दूर चलकर रोड पार कर । समुद्र किनारे जाकर एक जगह बैठ गई । समुद्र की आती हुई लहरों की आवाज़ उसे सूकून दे रही थी  । शादी में आए हुए बहुत से मेहमान इस वक्त समुद्र किनारे टहल रहे थे । स्वाति वहीं बैठ कर सुबह की घटना के बारे में सोच ही रही थी कि उसे एक जानी पहचानी सी आवाज़ में किसी ने उसे आवाज़ दी । हैलो ! स्वाति ने देखा की सौरभ और उसके दोस्त रविश उसे हैलो बोल रहे थे । अभी आप का हाथ कैसा है ! ज्यादा दर्द तो नहीं हो रहा ? रविश ने पूछा ! 
स्वाति - पहले से बेहतर है  और दर्द तो बिल्कुल भी नहीं हो रहा है । धन्यवाद रविश जी । 
रविश चौंकते हुए - आपको मेरा नाम कैसे पता ! जहां तक मुझे याद है , मैंने आपको अपना नाम नहीं बताया है । 
स्वाति ने मुस्कुराते हुए कहा - जरा अपने पीछे देखिए । रविश ने जब पीछे देखा तो पाया कि , शादी में आई अधिकतर लड़कियां यहां टहल रही है और मजे की बात ये है कि सबने बहुत सारा मेकअप किया हुआ है ‌। 
स्वाति ने कहा - ये जो आप लड़कियां देख रहे हैं ना ,जब देखो तब आप की ही बातें करती रहती हैं सब । जब दोपहर में आपने गाना गाया ना तभी से ही आप के बारे में बातें हो रही हैं । तभी पता चल गया था । रविश था ही इतना हैंडसम की कोई भी लड़की उससे शादी करना चाहे । स्वाति और सौरभ , रविश की ओर देखकर हंसने लगे और जब स्वाति हंस रही थी तो रविश बस स्वाति के चेहरे को देखे जा रहा था । कितनी मासूम और निश्चल हंसी है इसकी । रविश के दिल ने कहा ! स्वाति का इस तरह हंसना उन लड़कियों को अच्छा नहीं लगा । वो समझ गई कि स्वाति हमें ही देखकर हंस रही है और दो मिनट में सब वहां से खिसक गई । स्वाति ने भी उन दोनों को शुभरात्रि कहा और अपनी मां और बेटे के पास आकर सो गई । वहीं होटल के एक कमरें में स्वाति की रिश्तेदार की एक बेटी बहुत गुस्से में थी । उसने जब से रविश को देखा था । उसे पसंद करने लगी थी । वो जब भी रविश के करीब जाना चाहती । स्वाति को रविश के करीब पाती । नेहा ! नेहा अपनी मां - बाप की इकलौती संतान है । उसने जिस चीज पर हाथ रखा वो चीज उसकी हों जाती । आज उसी का नतीजा है कि नेहा रविश से शादी करने की जिद करने लगी । अगली सुबह रविश के  माता-पिता और सब हल्दी की तैयारी कर रहे थे । उसी समय नेहा के मम्मी - पापा रविश के पैरेंट्स से अपनी बेटी नेहा की रिश्ते की बात चलाने लगे । जब रविश के माता-पिता ने कहा कि अगर रविश और नेहा एक - दूसरे को पसंद करते हैं तो हम आज ही दोनों की सगाई करा देंगे । लेकिन उससे पहले हमें रविश से बात करनी होगी । नेहा के घरवालों को लगा की कहीं रविश के माता-पिता रविश की पसंद से उसकी शादी स्वाति ना करा दें । इसलिए उन्होंने स्वाति के खिलाफ बहुत सी  उल्टी-सीधी बातें कही और ये भी कहा कि अब उसकी नजर आपके बड़े बड़े पर है । ये कह कर वो वहां से चलें गये ।