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जिसके अल्फाजों को भुलाने में, जमाने लगे हैं !
उस शख्स के खत ,फिर से मुझे आने लगे हैं !!
उस शख्स........
वो लिखते हैं बस तुम ही हो जिंदगी मेरी !
कसमें वफा की सारी , दोहराने लगे हैं !!
उस शख्स........
मानू मैं कैसे पहली सी मोहब्बत की गुजारिश !
मेरे जज्बात मुझ पर उंगलियां उठाने लगे हैं !!
उस शख्स ...........
जिस ख्वाब को पाने की ख्वाहिश रही उम्रभर !
वह ख्वाब ही हकीकत में बहुत डराने लगे हैं !!
उस शख्स .......
जिस दिन से मांगा है जमाने से हक अपना !
मेरे अपने भी मुझसे बहुत कतराने लगे हैं !!
उस शख्स .........
एक दबी सी चिंगारी है , मेरे अंदर कहीं !
बनकर हवा वह मुझे सुलगाने लगे हैं !!
उस शख्स..........
थाम कर हाथ छोड़ना रवायत नहीं है दिल की !
और वह मुझे वफा के नए सबक पढ़ाने लगे हैं !!
उस शख्स ............
......✍️पिंकी मिश्रा
भागलपुर बिहार।

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