हस्ती को मुहब्बत में फ़ना कौन करेगा!
जब हम ना रहेंगे तो वफ़ा कौन करेगा !!
ये माना मेरी जान
मेरी ये सलोनी सूरत
खटकती है
तुम्हारी आँखों में
काँटों सी मगर
काँटे ही किया करते हैं
फूलों कि हिफाज़त
ये हक़ सिवा मेरे फिर अदा कौन करेगा!
जब हम ना रहेंगे तो वफ़ा कौन करेगा!!
ये माना मेरी जान
कि तुम हो दुश्मन
मेरी इस जान के
मगर आज तक फिर भी
दुआ करते आए हैं कि
ए ख़ुदा मेरे दुश्मन को
सलामत रखना
वरना मेरे मरने कि दुआ कौन करेगा!
जब हम ना रहेंगे तो वफ़ा कौन करेगा!!
ये माना मेरी जान
मिलनी हैं जफ़ाएं मुझको
लाख वफ़ाओं के बदले
मगर गुनगुनाता हूँ
हर वक़्त अकेले में
मेरे हाथों की लकीरों को
देख जरा नजूमी
ये बता कि मेरे संग वफ़ा कौन करेगा!
हस्ती को मुहब्बत में फ़ना कौन करेगा
जब हम ना रहेंगे तो वफ़ा कौन करेगा!!
सतीश निर्दोष
रेवाड़ी (हरियाणा)