रिमझिम बारिश मैं और तुम!!
चमके बिजली चम-चम-चम,
पायल छनके छन-छन-छन,
चूड़ी बाजे खन-खन-खन,
मदहोश प्रिया पा पी आलिंगन।
आसमाँ में छाए बादल,
हवा हुई है देखो शीतल,
बृक्षों में आई नव कोपल,
पपीहा चाह रहा स्वाति जल।
प्रमुदित हो मन नाचती मोरें,
मधुर-मधुर ध्वनि दादुर बोलें,
झन-झन झींगुर की झनकारें,
पा बरखा जल नदी हिलोरे।
फूले फले सदा तरु कानन,
रहत एक संग गज पंचानन,
धरा हुई है जैसे गुलकंद,
पान करे भंवरा मकरन्द।
घनघोर घटा संग बरसे सावन,
प्रीतम संग भींगे जब तन-मन,
छप-छप बारिस है मन भावन,
रिमझिम बारिश मैं और तुम।।
शीला द्विवेदी "अक्षरा"
उत्तर प्रदेश।

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