वैसे साहब जी आप वहां कैसे आए थे इतनी छोटी चाय की टपरी पर आपको देखकर हैरानी हुई।
कृष्णा इस नदी में मैंने अपने पिताजी की अस्थियां
विसर्जित की थी। जब मैं परेशान होता हूं तो इस नदी के किनारे आकर बैठ जाता हूं ।और यहां की चाय मुझे बहुत पसंद है। यहां मुझे अपनी समस्या का भी समाधान मिल जाता है शायद मेरे पिता का आशीर्वाद मुझे यहां प्राप्त होता है असीम शांति प्राप्त होती है ।
मैं परेशान था और तुम्हें देखकर मुझे अपनी समस्या का हल मिल गया।घनश्याम जी ने उसे अपनी गाड़ी में बैठने के लिए कहा।
अभी छोटी सी जान और मैं हम दोनों ही साथी हैं एक दूसरे का सहारा बनेंगे अब यही मेरा सब कुछ है भगवान ने शायद मुझे एक पिता के रूप में यह कार्य करने के लिए सौपा है। इसकी जिम्मेदारी मैं हर प्रकार से निभाऊंगा चाहे मुझे इसके लिए कुछ भी सहना पड़े। किसी के लिए इसकी जरूरत नहीं होगी लेकिन मैं इसके लिए एक आदर्श पिता बन कर दिखाऊंगा।
घनश्याम जी बोले तुम्हें हमारे घर की पूरी देखरेख करनी है यही तुम्हारा कार्य है तुम्हें जो भी कार्य दिया जाए उसे अपना समझ कर करना है बस यही तुम्हारा कार्य है।
कृष्णा पीछे पीछे घनश्याम जी के साथ हो लिया और बोला आज से मेरी जिंदगी आप के हवाले आप जैसा कहो। आप मालिक मैं नौकर जिस रूप में रखना चाहोगे उस रूप में रहूंगा मुझसे कभी भी तुम्हें बेवफाई या धोखा नहीं मिलेगा मैं आपको वचन देता हूं।
घनश्याम जी बोले मुझे तुम पर पूरा विश्वास है इसीलिए तुमसे यह कार्य करने के लिए कहा है।घनश्याम जी ने उसे अपनी गाड़ी में बैठने के लिए कहा। कृष्णा हिचकते हुए गाड़ी में बच्चे के साथ बैठ गया। इतनी बड़ी बड़ी गाड़ियां उसने चलते हुए देखी थी इतनी शानदार गाड़ी में बैठना ही उसको सपना पूरा होने जैसे लग रहा था। आराम से बैठो कृष्णा नहीं तो बच्चे को तकलीफ़ होगी। साहब आप मेरी चिंता नहीं करें मैं ठीक हूं।
और कहो कृष्णा इस बच्चे का नामकरण कब करोगे। बस साहब मन्दिर में दर्शन कर इसका नाम उन्हीं के नाम पर दुंगा यह वैसे भी उन्हीं की देन है।मेरी अंधेरे जीवन में यह एक रोशनी का दीपक बन कर आया है।
ठीक है रास्ते में ही मंदिर पड़ता है मैं वहां गाड़ी रोक देता हूं। इसी बहाने प्रभु के दर्शन कर लुंगा।
दोनों मन्दिर पहुंच गए। पंडित जी ने तुरंत घनश्याम जी को पहचान लिया।वह उनके सम्मान में खड़े हो कर उनका अभिवादन किया।
नहीं पंडित जी आपके हाथ जोड़ रहे हैं हम मंदिर में प्रभु के सामने आए हैं तो हाथ तो हमें जोड़ने है।
आप हमारे एम एल ए हो आप की वजह से हमें सभी सुविधाएं प्राप्त है।
ऐसा न कहें। आप हमारे पुजनीय है। आप सदैव अपना आशीर्वाद हमें देते रहे।
आशीर्वाद तो आपको भगवान का मिला हुआ है।
इतने सज्जन व्यक्ति को भगवान हमेशा खुश रखे।
पंडित जी। यह कृष्णा है हमें इसके बच्चे का नामकरण करना है। पंडित जी कोई अच्छा सा नाम सुझाए। पंडित जी बोले प्रभु के दरबार में आए हैं तो इनके नाम से अच्छा और क्या नाम होगा। आज से इसका नाम मोहन है। कृष्णा ने भी खुशी जताई उसके बच्चे का नाम आज से मोहन हो गया। गर्दन नीचे झुका कर कृष्णा ने पंडित जी का आभार व्यक्त किया।
घनश्याम जी ने पंडित जी के दक्षिणा दी और वहां से चल दिए।
दोनों गाड़ी में बैठकर और एक सुंदर सी शानदार हवेली के सामने जाकर गाड़ी रुकी जिसे देखकर कृष्णा पहले तो बहुत अचंभित हो गया कि हम इतने बड़े घर में रहेंगे क्या इस बच्चे की वजह से मेरी किस्मत बदल गई है मैं अपनी किस्मत पर और उस बच्चे पर नाज करने लगा कि शायद भगवान ने मेरे लिए और ही कुछ लिखा है।
नीलम गुप्ता( नजरिया)
दिल्ली

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