मेरे प्रेरणा स्त्रोत सर डॉ राकेश उपाध्याय
को गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर सादर समर्पित


मैं कैसे अभिव्यक्त करूँ
कैसे करूँ परिभाषित
'सर'आपके सामने
सभी शब्द
सभी परिभाषाएं
छंद अलंकार सारे
संधि-समास व रस
सब तुच्छ नजर
आते हैं।
मैं एकलव्य सी
श्रद्धा विश्वास
रखती हूँ
मुझे आपमें
पांचाली के
कृष्ण नजर
आते हैं।

जीवन को नई राह दिखाने वाले
सर के सम्मान में मात्र कुछ पंक्तियाँ
सर के लिए लिखने में मेरी लेखनी
बहुत छोटी हैं।
  सादर प्रणाम सर

गरिमा राकेश गौत्तम
कोटा राजस्थान