पर्वत को भी राख बना दे,
ऐसी चिनगारी को आना था!
स्वदेश की जग में शान बढ़ाए,
ऐसी नारी को जग ने जाना था!!
सदियों से जैसे नारी,
घर का भार उठाती है!
आज देश की बेटी बनकर,
देश के गौरव का भार उठाना था!!
मीराबाई चानू को आज,
आम जनता ने पहचाना था!
अनेक बेटियों ने उनको,
अपना आदर्श भी माना था!!
लाचारी में बीता बचपन,
जवानी का न ठिकाना था!
घर में न थी बैलगाड़ी,
वन से लकड़ी का गट्ठर लाना था!!
उसकी शारिरीक क्षमता का,
गाँव में हर कोई दीवाना था!
बड़े भाई ने हो अचंभित,
उसे शक्ति का स्वरूप माना था!!
तीरंदाजी का स्वप्न छोड़कर,
कुछ नया कर दिखाना था!
छुपी हुई प्रतिभा को समझा,
अब भारोत्तोलन में जाना था!!
सर्दी-गर्मी धूप-छाँव को,
जिसने ना बिलकुल जाना था!
लक्ष्य को करना है हासिल,
उसने ये मन मैं ठाना था!!
कुंजरानी से भेंट हुई जब,
आदर्श उन्हीं को माना था!
उनके बनाए रिकॉर्ड को तोड़,
आशीष उन्हीं का जाना था!!
भारत की बेटी बनकर अब,
विश्व में नाम कमाना था!
हम दुनियां में सर्वश्रेष्ठ है,
यह लोहा मनवाना था!!
पदक पर पदक जीते उसने,
नतमस्तक हुआ जमाना था!
जगत में भारत की बेटी का,
अद्भुत वह कारनामा था!!
भारोत्तोलन में रजत जीतकर,
टोक्यो में तिरंगा फहराना था!
वतन का ये श्रेष्ठ वसन,
दुनिया भर में लहराना था!!
देश-प्रेम की पराकाष्ठा को,
पवित्र मन से निभाना था!
देश की माटी संग में रखती,
गठरी में देश का दाना था!!
देश के अन्न की ताकत को,
दुनिया भर में दिखाना था!
अमेरिका की होटल में उसको,
देश का धान पकाना था!!
नतमस्तक थे राष्ट्रपति भी,
देश-प्रेम को जाना था!
जीत का डंका बजा गए वो,
सारी दुनिया को बताना था!!
मेहनत ही जीवन का आधार,
दुनिया को जीत जाना है!
संघर्षों में तपकर हमको,
जीवन सफल बनाना है!!
रंजना सोनी
(स्वरचित एवं मौलिक)

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