जीवन एक संघर्ष है,
संघर्ष ही तो जीवन है,
जीवन की सार्थकता,
जीवन में कर्मठता,
से ही मिलती सफ़लता,
संघर्ष ही तो जीवन है,

जीवन एक संघर्ष है,
बिन संघर्ष के क्या...?
होता है मुकाम हासिल!!
संघर्ष तो शुरु हो जाता है,
इस जहां में जन्म लेने से,
संघर्ष ही तो जीवन है,

जीवन एक संघर्ष है,
जन्म लिया इस संसार में,
कैसा उसका है जीवन,
समझ पाया है कोई...?
हंसना रोना, सोना,
क्षुद्धा को शांत करना,

वो बता पाता नहीं,
अपनी तकलीफों को,
न ही कुछ बोल पाता,
न ही कुछ बता पाता,
कितना कष्टदायी जीवन,
संघर्ष ही तो जीवन है,

फिर भी मुस्कुराता है,
खिलखिलाता है वो,
दुख में भी सुख है,
ये जतलाता हमको,
हम समझ न पाये कभी,
संघर्ष ही तो जीवन है,

बड़ा ज्यौं होता जाता,
कांधे पर बोझ बढ़ता,
पहले पुस्तकों का,
पढ़ाई-लिखाई का फिर,
जूझता बेरोजगारी से,
संघर्ष ही तो जीवन है,

बेरोजगारी की मार से,
त्रस्त और विचलित मन,
कुंठाग्रस्त होता जीवन,
अचानक से मिलती,
उसे नोकरी सरकारी,
संघर्ष ही तो जीवन है,

फिर करता प्रवेश वो,
गृहस्थ जीवन के,
सुखमय संसार में,
गृहस्थी के बोझ तले,
पिसता संघर्ष की चक्की में,
संघर्ष ही तो जीवन है,

माँ का संघर्ष कभी,
न समझ पाया तू ,
जो न रात देखी न दिन,
चूल्हा चौका और बच्चे,
पति की सेवा करना,
रखना सबका ध्यान,
संघर्ष ही तो जीवन है,

पिता जो होता है,
घर का वट वृक्ष,
कौल्हू के बैल की तरह,
पिसता संघर्ष चक्की में,
उसे कोई समझ न पाया,
संघर्ष ही तो जीवन है,

शुरु हुआ है आज,
तेरा जीवन संघर्ष,
विचलित क्यों होता है,
पिस कर संघर्ष की,
चक्की में होता है,
कुंदन सा जीवन,
संघर्ष ही तो जीवन है,

जिसने कर ली,
माँ बाप की सेवा,
कर्मठता को अपनाया,
संघर्ष की चक्की में,
पिसकर आया,
उसने अपना जीवन,
सफल बनाया,

बिना संघर्ष के,
कैसा है ये जीवन,
संघर्ष में ही तो सुख है,
कहते हैं दुख के बाद,
आता सुख है जीवन में,
फ़लसफ़ा है जीवन का,
संघर्ष ही तो जीवन है ।

  काव्य रचना-रजनी कटारे
        जबलपुर ( म.प्र.)