प्रेम की परिभाषा।
मेरे दिल की जुबां है।
एक संदेश कैसे भेजूं।
तुझसे दूर रहना ही सजा है।
जान लेना इन हवाओं से।
मेरे दिल का हाल।
ठंडी में भी गर्म आहें भरती है ।
मेरी हर सांस ।
ना तेरी जुदाई सही जाती है।
एक टुकड़ा मेरे मन का।
धूप में तप रहा ।
एक लम्हा याद भी तेरी अगन लगाती है।
चाँद की चाँदनी भी ।
शीतल कहाँ रही।
पूछ लो इसी से।
हर रात आकर मुझे और जलाती है।
किस तरह से भेजू ।
मै अपने प्यार का पैगाम।
जब ये सावन भी।
काली घटा बन तड़प बरसाती है।
मन से मन का मेल ही।
दूर तलक दिल तक संदेश पहुँचाएगा।
और कोई राह ना मुझे ।
तुझसे मिलन का नज़र आता हैं।
अनुराग अनुभव कर लेना।
मेरे अंतर्मन का हाल।
खुद आकर सुध ले लेना।
सुन धड़कनों में अपना नाम।
नीलम गुप्ता ,🌹🌹(नजरिया)🌹🌹

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