मानव की माया पर्यावरण को संकट में लाया
देश को विकसित बनाया
पर्यावरण को खूब सताया
पेड़ों को काट कर
वर्षा को दूर भगाया
मानव जाति को घोर संकट में लाया
अपने स्वार्थ को दिया बढ़ावा
पर्यावरण को खूब सताया
पंछी सारे हो गए लुप्त
मानव हो गए सुस्त
भव्य मंजिलें तो खूब बनाया
पर्यावरण को खूब सताया
प्रदूषण को खूब बढ़ाया
मानवों को प्रदूषण की चपेट में लाया
मानव को मानवता फिर भी समझ में नहीं आया
पर्यावरण को खूब सताया
पर्यावरण की दुहाई सुन लो
पेड़ काटने वाले क़साई
पेड़ लगावो पर्यावरण को बचावो
देश बचाओ पर्यावरण को स्वच्छ बनावो
आपका :- अफ्फान हाजिपुरी

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