प्रचीन काल में निर्जन नदी किनारे ,गुफाओं में तपस्या करते थे साधक।लोगों से कोलाहल से दूर।पर आज इतने बाबा सन्यासी हो गये और चेलो की क्या कहें?एक कहावत याद आ रही--
"अंधेर नगरी चौपट राजा।"
शिष्य रातों रात (रहीस)अमीर बन जाना चाहते हैं,और ढोगी बाबा चमत्कार,दिलासे भभूत और चुटकी बजाते अमीर बनने का गुरु मंत्र भी देते हैं।
हमारे समाज में चूंकि महिलाओ की स्थिति खराब है,दोयम दर्जे की है और उत्पीड़न भी होता है।इसलिए वे ऐसे बाबाओं के चक्कर में फंस जाती है और अपना जीवन बर्बाद कर बैठती है।चढ़ावा पैसों के अलावा शारीरिक शोषण का शिकार भी बनती हैं।मैं नाम नहीं लूँगी पर जेल की हवा काट रहे हैं।
मैं सिर्फ इतना जानना चाहती हूँ कि ईश्वर से सम्पर्क के लिए बैसाखी की जरूरत कहाँ है?
अपने सामर्थ्य पर विश्वास क्यों नहीं रखता इन्सान।क्यों रातोंरात अमीर हो जाना चाहता है।मेरे विचार से विवेक होना आवश्यक है,और मेहनतकश।जो समय की कद्र करता है वही आगे बढ़ता है,सफलता हासिल करता है।
ढोगी बाबा सिर्फ़ शिष्यों की बढ़ती संख्या और अपनी बढ़ती पैठ चाहते हैं।
ईश्वर के लिए पूजा पाठ ,ध्यान जप से सच्चे साधक को फुर्सत नहीं मिलती तो भीड़ में समय बरबाद वे क्यों करेंगे?
चुटकी बजाते हर समस्या का निवारण करने वाले बाबा धोकेबाज होते हैं जो भोलेभाले लोगों की भावनाओं के साथ खेलते हैं।ब्लैकमेल करते हैं।
इस पर ---
ढोगी बाबा और उनके शिष्यो को,
मेरा दूर का प्रणाम है।
अकर्मण्य चेलों को,रातों रात अमीर बनना है,
गुरु लालच दे पुचकारते।
झांसे वाले बाबाओ का,
हवालात है ठिकाना ।
भोली भाली पारिवारिक शोषित महिला,
झाड़ भूख में फंसकर अपनी इज्ज़त को लुटाती।
चेत जो जाये जनता,
बंद दुकान हो बाबाओं की।
मेहनत करने से डरते हैं ,
गुरु पैसों का लालच देकर जाल बिछाते।
ढोगी बाबाओ की अमरबेल है,
हर शहर गली में मिल जाते।
-----अनिता शर्मा झाँसी
------स्वमौलिक रचना

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