रागिनी जी ने घनश्याम जी से कहा बिटिया ने कैरियर अपना बना लिया है।अब हमें उसके अपने घर परिवार के बारे में सोचना चाहिए।
आप उससे शादी की बात करें। इतनी भी क्या जल्दी है अभी तो वह बहुत भोली है।
आप भी ना। आपको अपनी बिटिया कभी सयानी नहीं लगेगी। लेकिन एक मां को बिटिया के बड़े होने का पता चल जाता है।
ठीक है रागिनी मैं मौका देख कर उससे बात करुंगा।
तभी मोहिनी बाहर से आई और उसने अपनी मम्मी पापा की बात सुनी सुनकर वह घर के अंदर चली गई।
रागिनी जी ने घनश्याम जी से कहा कि देखो मोहिनी ने हमारी बात सुन ली है अब बात करने में आसानी होगी।
घनश्याम जी ने कहा ठीक है मैं शाम को बात करता हूं।
जब रात को सब खाने पर एक साथ बैठे हुए थे तो घनश्याम जी ने मोहिनी से बात छेड़ी कहो बेटा अब आगे क्या प्लान है।
मोहिनी ने कहा कुछ नहीं पापा अपने प्रैक्टिस करना जारी रखना चाहती हूं उसके लिए मुझे जॉब करना जरूरी है।
घनश्याम जी ने कहा तुम्हें चुप करने की क्या जरूरत है हम तुम्हारे लिए नया नर्सिंग होम खुलवा देंगे।
नहीं पापा पहले मैं नौकरी कर कर अपनी प्रैक्टिस अच्छे से करना चाहती हूं और अधिक सीखना चाहती हूं फिर मैं अपना क्लीनिक खोलूंगी।
घनश्याम जी ने कहा ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी और बताओ अपनी जिंदगी के बारे में तुमने क्या सोचा है कब तक शादी करने का प्लान है।
मोहिनी यह बात सुनकर थोड़ा शर्म आई और बोलिए आप इस बारे में फिक्र मत करो।
क्यों ना फिकर करे बेटा यह हमारी जिम्मेदारी है कि तुम अच्छे घर में सेटल हो जाओ। यदि तुमने उसी को पसंद कर रखा है तो वह भी हमें बता सकती हो।
मोहिनी थोड़ा हिचकी लेकिन उसने शर्म से आंखें झुका कर पापा को हां में जवाब दिया।
ओ हो तो हमारी बेटी ने इसी को पसंद कर रखा है और हम तो ऐसे ही परेशान हो रहे थे अच्छा बेटी बताओ वह कौन है और हमें कब उस से मिलवा रही हो।
मोहिनी बोली आप सभी उसे जानते हैं मैंने जो पसंद किया है आपको भी मेरी पसंद पसंद आएगी।
घनश्याम जी और रागिनी जी की उत्सुकता बढ़ने लगी ऐसा कौन सा इंसान है जिसको हम जानते हैं और हमारी बेटी पसंद करती है और हमें इस बारे में कुछ भी मालूम नहीं।
बेटी साफ-साफ बताओ कौन है उसे हम जल्द ही मिलना चाहते हैं।
मोहिनी बोली मैं मोहन को बहुत पसंद करती हूं और आप लोग भी उसे पसंद करते हैं मैं जानती हूं।
यह सुनकर रागिनी जी थोड़ा चौक गई कहने लगी नहीं तुम मेरी इतनी सुंदर बेटी हो और कहां मोहन उसका रंग तो बहुत सावला है मैं अपनी बेटी के साथ ऐसे इंसान की जोड़ी नहीं बना सकती।
मोहिनी ने कहा मां आपके मंदिर में एक किशन भगवान जी की मूर्ति है आप उनसे प्यार करती हो या नहीं पहले मुझे इस बात का जवाब दो।
रागिनी ने कहा वह भगवान है और मैं उन्हें बहुत मानती हूं उनमें मेरी बहुत अटूट श्रद्धा है वह मेरा हर कार्य करने में मेरा साथ बनाए रखते हैं।
मोहिनी ने कहा जैसे आपको अपने सांवले कृष्ण कन्हैया पर भरोसा है। उसी प्रकार मैं अपने मोहन पर पूरा भरोसा करती हूं ।वह मेरी आंखों का काजल बनेगा ।और मुझे किसी प्रकार का कष्ट नहीं देगा मैं उसकी आदतों से अच्छी तरह वाकिफ हूं ।मैं किसी अनजान इंसान से शादी नहीं कर सकती ।क्योंकि मैं मोहन को शुरू से ही पसंद करती हूं शुरू से ही वह मेरी आत्मा में बस चुका है। जैसे आपकी आत्मा में आपके कृष्ण कन्हैया बसे हुए हैं इसी प्रकार मोहन भी मेरे दिल में बस चुका है।
मोहिनी की यह बातें सुनकर रागिनी हुई उसकी हां में हां मिलाई और घनश्याम जी ने भी कहा ठीक है बेटी तुम्हें जो पसंद हो हम उससे तुम्हारा विवाह करा देंगे और मोहन तो वैसे भी बहुत सुलझा हुआ इंसान है और कामयाब भी मुझे कोई आपत्ति नहीं है।
मैं कल ही कृष्णा  से इस बारे में बात करता हूं।
सुबह होते ही घनश्याम जी तैयार होकर बैठ गए। और कृष्णा से मिलने निकल गए।
कृष्णा ने देखा कि घनश्याम जी आए हैं।
साहब जी आप क्यों आए आप मुझे बुला लेते।
कृष्णा आज से क्या तुम मेरे  सम्बंधी बनने को तैयार हो।
कृष्णा बोला साहब जी आप यह क्या कह रहे हैं वह एकदम से अचंभित हो गया।
हां कृष्णा सही कह रहा हूं मैं अपनी मोहिनी के लिए तुम्हारे मोहन का रिश्ता चाहता हूं।
तुम मोहन से बात करके बता देना।
साहब जी यह कैसे हो सकता है मोहिनी बिटिया मेरे घर की बहू बनी है यह सपना भी नहीं देख सकता।
यह सपना नहीं है कृष्णा यह सच है एक बार तुम मोहिनी से अपने आप पूछ लेना और मोहन का भी जवाब बता देना।
तभी मोहन वहां जाता है और कृष्णा मोहन से वही पूछता है क्या बेटा तुम मोहिनी को अपनी जीवनसंगिनी बनाओगे।
मोहन, घनश्याम जी को और कृष्णा जी को देखता रह जाता है। बाबा आप जैसा सही समझो। वैसा करें मुझे आपकी हर बात मंजूर है।
कृष्णा फूला नहीं समा रहा था वह कैसे एकदम से घनश्याम जी को देखता रह गया और उसने हां में गर्दन हिला दी।
घनश्याम जी कृष्णा जी के गले मिले और रिश्ता पक्का कर दिया।
घनश्याम जी के जाने के बाद।
कृष्णा ने मोहन से बात की देखो अच्छे का आश्रम के कारण ही मोहिनी बिटिया जैसी बहू हमारे घर आएगी उसे हमेशा खुश रखना और उसे कभी किसी प्रकार का दुख मत देना।
बाबा यह सब आपके संस्कार हैं।
मोहिनी और मोहन जी धूमधाम से शादी हो गई दोनों सुख पूर्वक रहने लगे।
मोहन भी डॉक्टर की उपलब्धि में मशहूर हो गया मैं बच्चों के ऑपरेशन करता था जो उम्र में छोटी-छोटी कमियां होती थी एक दिन उसके सम्मान के लिए एक स्वागत समारोह का आयोजन किया गया।
पूरा परिवार उस स्वागत समारोह में शामिल हुआ ।घनश्याम जी बी रागनी को लेकर वहां पहुंचे।
माइक पर मोहन को पुकारा गया कि हमारे शहर के एमएलए कोई दमाद और हमारे डॉक्टर जी का मंच पर स्वागत है।
मोहन तुरंत माई के पास गया और बोला पहले में अपने कृष्णा बाबा का बेटा हूं उसके बाद घनश्याम जी का दमाद हूं मेरी पहचान मेरे कृष्णा बाबा है उन्हीं की वजह से आज मुझे यह सफलता और सम्मान प्राप्त हुआ है उन्होंने ही मुझे  इस काले रंग को सफलता की चमक के आगे फीका कर दिया।
मेरे जीवन में सर्विण प्रकाश फैला दिया।
मंच पर कृष्णा ने अपनी बाबा को बुलाया और जो फूलों का हार और इनाम दिया गया है उसने अपनी बाबा के हाथों में देखकर आशीर्वाद प्राप्त किया कहां जिसका ऐसा बाबा हो उसको कभी जीवन में पछताना नहीं पड़ेगा और वह सफलता की सीढ़ियां चढ़ता रहेगा।
चारों तरफ तालियों की गड़गड़ाहट गूंजने लगी आज कृष्णा ने अपने ऊपर गर्व महसूस किया। सावला होना इंसान की पहचान नहीं है उसके अंदरूनी गुण उसकी असली पहचान है और उसकी असली पूंजी है।
समाप्त। 

नीलम गुप्ता🌹🌹(नजरिया)🌹🌹
           दिल्ली