"'''''''''''''''''''''''''''''
एक औरत की कोख से जन्म तू लिया !
दुसरी को देवदासी बना क्यों दिया ?
एक बहन की आबरू उम्र भर बचाते रहे ,
दूसरे की बोली लगा क्यों दिया ?
औरत नहीं आती है शौक से बाजार में ,
इसको यहां पर बिठा क्यों दिया ?
तुम्हें मालूम है वह भी इंसान हैं ,
यूं सामान सा हक जता क्यों दिया ?
करके भरोसा उसने खुद को सौंपा तुम्हें ,
फिर कहो तुमने दगा क्यों दिया ?
बुनना चाहती है वह भी ख्वाब जिंदगी के,
अधूरे ख्वाब में उसे जगा क्यों दिया !!
.......✍️ पिंकी मिश्रा

0 टिप्पणियाँ