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आंसुओं से गुजारा 
अब यार नहीं होता
अब तो चले आओ 
दिल को इंतेज़ार नहीं होता

उस दिन ये लगता है 
दिन ही नही निकला
जिस दिन इन आंखों को 
तेरा दीदार नही होता

वक्त भी थम सा जाता है 
आंखें भर आती है 
ऐसा लगता है 
सदियां गुजर जाती है 
तेरे इंतज़ार में
जिस दिन तुझसे यार 
तकरार नही होता

तुफानों में भी हमने 
प्रेम के दिये जलाएं रखा है
तेरी आने की उम्मीद  
दिल में बसाये रखा है 
मालूम है प्रेम का मंजिल 
पाना आसान नहीं होता
पर तलबगारों के लिए 
कोई भी रास्ता दुश्वार  
नही होता

तेरी आने की आस में 
सांसें को भी रोक रखा है 
अगर सबूत मांगों तो 
अपने आंसूओं को भी 
सम्हाल कर रखा है

मुझे यकीन है ज़माने की 
बेड़ियां तोर कर आओगी
कसमें वादे निभाओगी 
क्युकी डरते वहीं है 
जिनको खुद पे एतबार 
नहीं होता 
अफ्फान हाजिपुरी ✍️
सर्वाधिकार सुरक्षित

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