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आदित्य बचपन से होशियार और अंतर्मुखी लड़का था पढ़ाई में भी काफी होनहार था लेकिन गरीब परिवार में पैदा होने के कारण उसको सारी सुख सुविधाएं नहीं मिल पाती थी
उसका बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना था उसके पिता एक कंपनी में छोटे से कर्मचारी थे फिर भी उन्होंने आदित्य की पढ़ाई के प्रति मोह को देखकर एजुकेशन कर्ज बैंक से लिया 
जिससे कि वह अपने बेटे का सपना पूरा कर सकें आदित्य अपनी मेहनत और लगन से एक अच्छा डॉक्टर बन जाता है और उसकी जॉब एक बड़े हस्पताल में लग जाती है
वहां उसकी मुलाकात मेनका नाम की एक लड़की से होती है जो दिखने में बहुत खूबसूरत और शालीन विचार की लड़की है
मेनका को पहली नजर में देखते ही आदित्य को  प्यार हो जाता है वह मेनका के जितने करीब आता है मेनका उससे उतनी ही दूरियां बनाए रखती है आदित्य की समझ में नहीं आता कि मेनका इतनी डरी डरी सहमी सहमी क्यों रहती है 
मेनका के चेहरे पर एक परेशानी का साया हमेशा छाया रहता है उसकी आंखों में दर्द साफ साफ दिखाई देता है मेनका का स्वभाव किसी से ज्यादा गुफ्तगू नहीं करना सिर्फ अपने काम से काम रखना है
आदित्य को तो बस मौका चाहिए कि किसी तरह मेनका के साथ वह समय व्यतीत कर सके और अपने मन की बात मेनका से बोल सके  हिम्मत करके एक दिन आदित्य ने मेनका से पूछ लिया कि तुम इतना मुझसे दूर दूर क्यों भागती हो
और इतना माथे पर परेशानी क्यों दिखाई देती है मेनका ने कहा नहीं मैं तो खुश हूं मुझे तो कोई परेशानी नहीं है और इतना समय ही कहां मिलता है जो मैं किसी से बातें कर सकूं चलिए बोलिए आप क्या बातें करना चाहते हैं 

आदित्य ने कहां मैं तुम्हें पसंद करने लगा हूं मेनका पहली नजर में ही तुमने मेरे दिल में जगह बना ली क्या हम दोनों एक साथ अपनी जिंदगी गुजार सकते हैं मेनका सुनकर घबरा जाती है और वहां से कोई भी जवाब दिए बगैर चली जाती है 
आदित्य समझ नहीं पाया आखिर वह ऐसा क्यों कर रही है आखिर आदित्य ने ठान लिया मैं इसका पता लगाकर ही छोडूंगा कि मेनका ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया रात की नींद दिन का चैन तो जैसे आदित्य खो ही चुका था
मेनका ने उस प्रस्ताव को सुनकर हॉस्पिटल में आना ही बंद कर दिया 
आदित्य  सुबह शाम मेनका की राह तकता लेकिन मेनका को ना पाकर परेशान हो जाता बस दिन-रात आंखों के सामने मेनका का मासूम चेहरा छाया रहता जब भी आदित्य से सहा नहीं गया तो उसने मेनका क उसने निश्चय किया कि वह रहस्य का पता लगाकर ही छोड़ेगा 

उसने हॉस्पिटल के रजिस्टर से मेनका का पता निकाला और गाड़ी निकाली बैठकर सीधा उसके घर की तरफ निकल पड़ा मेनका के घर में ताला पड़ा था पड़ोसी से पूछा पता चला कि  कहीं चले गए बिन बताए पता किया कि घर में कौन-कौन है तो मालूम चला एक छोटी बहन मां पिता और मेनका 4 सदस्य थे 
कितने दिन के लिए गए हैं कुछ पता नहीं आदित्य बहुत परेशान हो जाता है कि क्या करें क्या ना करें आखिर दिन महीने एक साल बीत जाता है एक दिन अचानक ही फोन की घंटी बजती है आदित्य उठाता है उधर से आवाज आती है हेलो मैं मेनका
आप आदित्य आदित्य तो जैसे चौक जाता है वह पूछता है तुम कहां हो मेनका मैं आपसे मिलना चाहती हूं
आदित्य मेनका से मिलने जाता है और जैसे ही डोरबेल बजाता है दरवाजा खुलते ही देखते ही आश्चर्यचकित हो जाता है
क्या देखता है मेनका एक छोटे से बच्चे को गोद में लिए हुए पूछने पर पता चलता है वह मेनका का ही बच्चा है आदित्य कहता है तुमने मुझसे पहले क्यों नहीं कहा कि तुम्हारी शादी हो चुकी है मेनका इस बात पर खूब रोती है और आदित्य के गले से लग जाती है
और बताती है आदित्य जानते हो मैं उस दिन आपको छोड़कर क्यों आ गई मेरे साथ एक हादसा हुआ था मेरा रेप हो गया था और काफी बदनामी के कारण हमने अपना घर भी छोड़ दिया था अब मैं आपसे कैसे बताती अपने अरमान मन में छुपाए मैं भी तुम्हें पसंद करती थी लेकिन नहीं चाहती थी कि तुम्हारी जिंदगी बर्बाद हो
अब उस हादसे से मैं ऊबर आई हूं 
मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ मुझे तुम्हारे साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था इसलिए फोन किया मुझे माफ कर दीजिए आप किसी अच्छी लड़की से शादी कर लीजिए मैं ऐसी जिंदगी से बहुत दूर आ चुकी हूं माफी चाहती हूं आदित्य को बहुत दुख होता है वह मेनका से कहता है तुमने मेरे अरमानों के साथ विश्वासघात किया जो भी था मुझे बताना था मैं तुम्हारा साथ देता  वह मनाने की भी कोशिश करता है मेनका को लेकिन मेनका को मनाने में नाकाम रहता है अपने टूटे दिल और अरमानों का गला घोट कर वापस चला जाता है
संगीता वर्मा