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कटती हैं हर दिन हमारी मुश्किल से तेरी यादो के सहारे
आओगे शाम को पनघट के किनारे देखती हैं राहें ये आँखे
एक एक पल सदियों सी लगती भाती नहीं कोई नज़ारे
बैठी हूँ आस लगाए दिल में आओगे एक दिन तुम लम्बा सफर से

कुछ लम्हो की मुलाक़ात में तुमसे एक गहरी नाता जुड़ गयीं
चलते चलते राहो में तुम्हारे जाने कितने रास्ते पीछे छूट गयीं
कभी तो रुकोगे कही ए मुसाफिर हमेशा केलिए तुम यही रुक जाना
बैठी हूँ आस लगाए दिल में आओगे एक दिन तुम लम्बा सफर से

आज भी महसूस करती हूँ ऊन उंगलियों को अपनी बालो में
जिस तरह संवारा करते थे तुम अपने हाथो से लगाये थे फूल मेरी बालो में
उलझी पढ़ी लट मेरी ढूंढ़ती हैं आज भी तेरे ऊन उंगलियों को
बैठी हूँ आस लगाए दिल में आओगे एक दिन तुम लम्बा सफर से

कैसे कैसे गुजारे हैं ज़िन्दगी तेरे बिना ओ हमदम मेरी
दिन गुज़रती हैं तन्हाइयो में होंठ खामोश होगई हैं मेरी
बैठ कर तेरे यादो में जो दिल अल्फाज़ पिरोया करती वो तुम्हे सुनाना हैं
बैठी हूँ आस लगाए दिल में आओगे एक दिन तुम लम्बा सफर से 

जाने कब वो दिन आएगी तेरे आने की खबर लेकर
सुरु होंगी उस दिन मेंरी ज़िन्दगी की एक नयी सफर
जितने भी सपने संजोयी हैं नैना वो पूरी होंगी हकीकत सारे हकीकत में
बैठी हूँ आस लगाए दिल में आओगे एक दिन तुम लम्बा सफर से....!!
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नैना...✍️✍️💞