मन मोहना
मेरे मुरली धारी 
प्रीत हो तुम

है मेरा प्रेम
समर्पित तुम्ही पे
मीत हो तुम

मैं तो हूँ दासी
तुम्हारे कदमों की
शीत हो तुम

साँवरे मेरे
रहते हो ध्यान में 
नित हो तुम

दोहराती हूँ
जो बार बार ऐसा
गीत हो तुम

           कु. आरती सिरसाट
          बुरहानपुर मध्यप्रदेश
स्वरचित एवं मौलिक रचना