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यूँ ऐसे दूर से ना तड़पते देखने को भी हम तूम्हे
अगर होते हम एक शहर की मेरे गली से तुम रोज़ गुजरते
शायद हमारी रोज़ रूबरू नहीं होना होता ज़िन्दगी में
लेकिन आते जाते एक दूसरे की दीदार जरूर कर लिया करते....!!
जब भी अपनी छत पर निकलती हूँ तब दिल उदास होजाता हैं
लगता हैं काश तुम्हारा गुजरना होता मेरे गली से तो कुछ अलग ही दिल के हाल होते
नहीं कर पाते हो दिल की बात हमसे आँखों में हम पढ़ लिया करते
जरूरत नहीं पढ़ती लफ्ज़ो में लिखना हम दिलके हाल भी बिन कहे पढ़ लेते....!!
जब जब हमारी आँखे मिलती हलकी हलकी मुस्कान चहरे पर खिल जाती
बाते किया करते खामोशियों से दिल के अजब हाल होती
क्या खूब आलम होती चाहत के,यूँ करना ना पड़ता शिकायत खुदा से
रोज़ ना सही कभी कभी तो दीद होजाया करती हमारी प्यारे चाँद के...!!
क्यूँ नहीं समझते हाल दिलके,आकर बस जाओ ना मेरी शहर में
खुद को भी इतना क्यूँ तड़पना परदेसी आजाओ हमारी देश में
अब अच्छा नहीं लगता बगैर तुम्हारे दिल बेचैन रहा करता हैं
अब तो ख़तम करो ये सिलसिला इंतज़ार की कब तक चाँद में तुझे देखा करें.....!!
छेड़ने लगी हैं हवाये भी मुझे लेकर तुम्हारी नाम से
लगता हैं पागल ही होजाउ गी दीवाने तेरे याद में
ऐसी हुई हैं लगी तुमसे की तेरे खयालो से आगे कुछ भी भाता नही
हसरत हैं कभी जो पूरा होगा मधु मिलेगी हकीकत में अपनी सनम से.....!!
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