(आराधना और मोहित की नजर आपस में मिलती है, मोहित उसे एकटक देख रहा था ओर आराधना के मन में एक अनजाना सा डर बैठता जा रहा था|)

(प्रार्थना सभा समाप्त होती है सभी विद्यार्थी अपनी कक्षाओं में जाते है, तभी एक धड़ाम की आवाज से पूरा हॉल गूँज उठता है|)

मोहित- अबे यार, ये लड़की है या कोई मोम का पुतला है? कभी भी कहीं भी टकरा जाती हो, आँखों पर पट्टी बांधकर आई हो क्या? 
किशोर- छोड़ ना यार आज इसका पहला दिन होगा तो थोड़ी नर्वस होगी, तू क्यों गुस्सा हो रहा है, टेबल ही तो गिरी है, तेरा पैर बच गया वो ही काफी है| 
मोहित- आज का दिन ही खराब है यार, गँवार की सूरत जो देख ली, चल यार अपनी क्लास में चलते हैं, देखते है कौन-कौन नई लड़कियाँ आई है क्लास में|
किशोर- ( चलते हुए) कहीं ये लड़की भी आ गई तो अपनी क्लास में? 
मोहित-  आ भी गई तो क्या हो जाएगा यार, इस गँवार लड़की को अच्छा सबक सिखाउँगा मैं|

( मोहित और किशोर का कक्षा में प्रवेश)
किशोर- अबे यार, देख वही लड़की है न ये! और तेरी ही जगह पर बैठी है, चल कोई नहीं हम दूसरी जगह बैठ जाते है|
मोहित- मेरी जगह मेरे सिवा और कोई नहीं ले सकता, चल बताते है इसको|
(आराधना सपना के साथ बैंच पर बातें कर रही है, तभी मोहित अपना बेग उस बैंच पर रखता है और गुस्से में आराधना को देखता रहता है|)
किशोर- तुम दोनों उठो यहाँ से, पता नहीं ये मोहित ओर मेरी बैंच है! तुम लोग कहीं और जाकर बैठ जाओ|
सपना- क्यों, ये बैंच तुम खरीद कर लाऐ हो क्या? या प्रिंसिपल सर ने तोहफे में दिया है तुमको!
किशोर- हम लोग हमेशा इसी बैंच पर बैठते है, इसलिए यह बैंच हमारी है, हटो यहाँ से|
आराधना- चल न यार, हम चले जाते है कहीं, आज हमारा पहला दिन है, मुझे बहस नहीं करनी|
मोहित- वैसे भी तुमसे बहस करना कौन चाहता है? जल्दी उठो हमारी जगह खाली करो|
सपना- अच्छा,अब से यह बैंच हमारी हो गई, वैसे भी इस पर तुम्हारा नाम नहीं लिखा है|
( गुस्से में लाल मोहित अपने बेग से काले रंग का मार्कर निकाल कर बैंच पर अपना नाम  लिख देता है|)
मोहित-  अब बोलो लिख दिया मेरा नाम, लड़की हो इसलिए समझा रहा हूँ, नहीं तो अब तक....
सपना- नहीं तो क्या?  बोलो आगे, धमकी किसको दे रहे हो? बुलाऊँ सर को|
(मोहित हँसकर बैंच के उपर बैठ जाता है ओर सपना को घूरता है|)
मोहित- सर को बुलाएगी? चल आज तो इस बैंच पर हम लोग ही बैठेंगे, तुम बुलाओ किसी को भी जो मुझे यहाँ से हटा सके|
( अमन सर का कक्षा में प्रवेश, सभी विद्यार्थी खड़े होकर उनका अभिवादन करते है, लेकिन मोहित अभी भी बैंच पर ही बैठा रहता है|)
अमन-  गुड मोर्निंग बच्चों| क्या हुआ मोहित, ऐसे बैंच पर क्यों बैठे हो, सब ठीक तो है ना बेटा?
मोहित-( मासूमियत से)  देखिए ना सर, हम हमेशा से इसी बैंच पर बैठते है, और ये दोनों हमसे ही बदतमीजी से बात कर रही है, आप ही समझाइए इनको|
सपना- नहीं सर, हम उठ भी जाते लेकिन जिस तरीके से ये हमको धमकी......
अमन- क्या तुम भी लड़कों के बराबर हो जाती हो, चलो उठो यहाँ से ओर दूसरी बैंच पर जाकर बैठो, कोई बात नहीं मोहित बेटा तुम दोनों अब बैठ जाओ यहाँ|
( आराधना और सपना अपना मन मसोस कर वहाँ से उठ जाती है, लेकिन इस बार आराधना के मन में डर की जगह गुस्सा होता है| वह सोचती है हमको हमारी बात रखने का मौका भी नहीं दिया गया,आखिर सब इसकी इतनी तरफदारी क्यों कर रहें है|)
( कक्षा में सभी विद्यार्थियों की जान-पहचान हो रही है, तभी आराधना की बारी आती है, हर साल कक्षा में प्रथम आने वाली आराधना आज अपने आप को उस कक्षा कि सबसे कमजोर छात्रा समझ रही थी, आज उसका आत्मविश्वास भी उसके साथ नहीं था, इस कारण वह सभी के बीच हँसी का पात्र बनती जा रही थी|)
अमन- क्या हुआ अपना नाम और दसवीं कक्षा में तुम्हारे प्राप्तांक कितने आऐ, सब अच्छे से बताओ| 
आराधना- जी... जी मेरा नाम....
(सभी उसकी तरफ देखकर हँस रहे है, गाँव की साधारण सी लड़की को इस विद्यालय में प्रवेश मिल जाना, सबको अचम्भित कर देने वाला था|)
मोहित- रहने दो सर, बेचारी अच्छे से बोल भी नहीं पा रही है, इसके क्या नम्बर आऐ होंगे.....( पूरी कक्षा ठहाकों से गूँज उठती है, पर आराधना नीचे नहीं बैठती, वह उन सबके बीच बोलती रहती है...)
आराधना- सर, मेरा नाम आराधना कश्यप है, और मेंने दसवीं में 98.89 प्रतिशत अंक प्राप्त कर के जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया है|
( पूरी कक्षा में सन्नाटा- सा छा जाता है, सब एक दूसरे का मूँह देख रहे है, ओर समझने का प्रयास कर रहे है की जो हमने सुना, सबने भी यही सुना था क्या....)

                                                   क्रमश: