बच्चों को क्यों लोग आज,वो संस्कार नहीं देते हैं।
होती है अनमोल चीज जो,उसे नहीं वे क्यों देते हैं।
पालन पोषण अच्छा करते,नये-2 खिलौने देते हैं।
वीडियो गेम,मोबाइल भी,सब जल्दी ही वो देते हैं।
खाने में चाकलेट,चिप्स नूडल,पिज्जा,बर्गर देते हैं।
मैग्गी,कोल्ड ड्रिंक,केकपेस्ट्री, फ़ास्ट फ़ूड दे देते हैं।
सुबह उठना चरण बड़ों का, छूना नहीं सिखाते हैं।
अपने सभी बड़ों का आदर, करना नहीं बताते हैं।
पहले पढ़ना और खेलना,सब से ज्यादा जरुरी है।
प्यार से सब के साथ रहो, झगड़ना नहीं जरुरी है।
झूठ कपट से दूर रहें और,मेहनत व ईमानदारी हो।
ऐसी शिक्षा संस्कार मिले,इसमें तेरी भागीदारी हो।
मेरा तो है यही मानना,देना यह संस्कार जरुरी है।
इससे जीवन खुशहाल रहेगा,ये संस्कार जरुरी है।
यदि कोई उपहार ना दो,बच्चा कुछ देर ही रोयेगा।
नहीं दिया संस्कार अगर,तो जीवन भर वो रोयेगा।
संस्कारी बच्चे जो होते,वो समाज के होते हैं जान।
हर दिल के वो प्यारे होते,जनगण के होते हैं शान।
जीवन में संस्कार नहीं,तो जीवन उसका है बेकार।
मिलती नहीं इज्जत उसको,होती नहीं जै जै कार।
पैसा चाहे भले कमा लो,धन की होती हो बौछार।
क्षमाशीलता,दया भावना,न आया तो सब बेकार।
मानवता के जो गुण होते, अगर नहीं है मानव में।
इंसा में गिनती न होती, गिनती होती है दानव में।
इसी लिए देना बच्चों को, संस्कार बहुत जरुरी है।
कभी न इससे पीछे रहना,जीवन में यही जरुरी है।
संस्कार में वो शक्ति है, जीत सके जो दुनिया को।
इससे ही व्यक्तित्व निखरता,बनता भी गुनिया वो।
माता-पिता हैं वो शिक्षक,जो संस्कार सिखाते हैं।
अपने बच्चों को घर से ही वो,ऐसा उन्हें बनाते हैं।
विद्यालय में गुरु कृपा से,उसमें चार चाँद लगाते हैं।
शिक्षा-दीक्षा वहीँ से लेकर,फिर वो नाम कमाते हैं।
दुनिया में ऐसे ही बच्चे,एक दिन करते हैं वो काम।
जिससे समाज सुखी है होता,लेता है उनका नाम।
होगा जो संस्कारवान वो, निश्चित दयावान होगा।
भले ना हो बलवान मगर,वह मूल्यवान तो होगा।
भाग्यवान भले न हो बच्चा,पर कर्मवान तो होगा।
मेहनत व ईमानदारी से, उसका सम्मान तो होगा।
जीवन में असफल ना होगा,जीवन सफल रहेगा।
संस्कार ऐसा धन है होता,ये जीवन सफल रहेगा।
रचयिता :
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव

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