वर्षों से जीवन से भरी इस दुनिया में
जींदगी के चौराहों पर दिलों में उजाले ढूंढता हूं मैं
अंधेरे अनजान रास्तों पर प्रेम मशालें लिए घूमता हूं मैं।।
दिलों में लाख बिछे हो नफरतों के कांटे
जीवन में फैले हो चाहे गहरे सन्नाटे
वर्षों तक प्रेम बांसुरी लिए अधरो पर
इंतजार में पलकें बिछाए राह निहारता हूं मैं
मेरी डगर आ जाए कोई प्रेम का प्यासा
कदम उसके ले हाथों में होंठों से चूमता हूं मैं
वर्षों से जीवन से भरी इस दुनिया में
जींदगी के चौराहों पर दिलों में उजाले ढूंढता हूं मैं
अंधेरे अनजान रास्तों पर प्रेम मशालें लिए घूमता हूं मैं।।
मैं प्रेम की मूरत
मैं प्रेम का ठहरा सागर तू बहती नदियां प्रेम की
प्रेम मिलन को बेताब है दोनों
प्रेम वश प्रेमी के संग
प्रेम मंदिर में प्रेम के झूले झूलता हूं मैं
प्रेम राग के प्रेम रास में
कभी गोपी कभी मनमोहन बन झूमता हूं मैं
प्रेम बंधन में बंधकर राही
स्व ईश्वर हूं यह भूलता हूं मैं
वर्षों से जीवन से भरी इस दुनिया में
जींदगी के चौराहों पर दिलों में उजाले ढूंढता हूं मैं
अंधेरे अनजान रास्तों पर प्रेम मशालें लिए घूमता हूं मैं।।
पिंटू कुमावत'श्याम दिवाना'🙏🙏💐💐

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