वंशिका बहु आदित्य सा का इंतजार आँखे बिछाए कर रही थी। इंतजार करते हुए इसकी आँखे बोझिल होने लगी। वो इंतजार करते हुए नींद से झुपने लग जाती है। इंतजार मे चेहरे की सारी खुशियाँ फीकी पड़ने लग जाती है।
उनको लगता वो अब नहीं आने वाले।उनका चेहरा रूआंसा सा हो गया था।
तभी तेज कदमो से चलते हुए आदित्य सा हवेली आते है। वो वंशिका बहु की ओर ध्यान न देते हुए अपने अलमारी से टावल लेकर वाशरूम मे फ्रेश होने चले जाते है। श्वेत सर्ट, काली पेंट , काली रँग की ब्लेजर टाई , पैरो मे ब्लेक शूज पहनकर बहुत ही फुटरे ( डैसिंग) लग रहे थे। वो खुशबू छिड़क कर महक रहे थे।
वो खुद को मिरर मे देखते है। अपने बालो को उँगलीयों से सँवराते है। दाएँ बाएँ होकर अपने आप को निहारते है। अपनी ब्लैजर को ठीक करते हुए वो वंशिका को आवाज देते है।
वंशु.....वंशु चलो जल्दी से उठो ...। चलो जल्दी करो बहुत देर हो रही है भई। सभी पार्टी मे हमारा इंतजार कर रहे होंगे। काम की वजह से मै पहले ही लेट हो गया हूँ ।
वंशिका के कानो मे जैसे ही आदित्य की आवाज पहुंँचती है। वो डर के मारे झट से काऊच से उठकर खड़ी हो जाती है। जी ...जी कहते हुए कहती है जी चलिये।
वंशिका कहकर आगे बढ जाती है। जाती हुई वंशिका को आदित्य पीछे से जोर से आवाज देते हुए कहते है रुको!! । उनकी आवाज सुनकर बढते हुए वंशिका के कदम रुक जाते है।
आदित्य वंशिका के सामने खड़े होकर उनको सर से पावँ तक देखते हुए चिल्लाते हुए कहते है। ये क्या पहन रखी हो ?? तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या?? ...हैब यू लोस्ट योर माईंड?? वंशिका का हाथ पकड़कर खींचकर उनको दर्पण के सामने खड़ा करके कहते है , देखो खुद को उसकी चुनड़ी और लहँगे को जोर जोर से झटक कर कहते है।
ओ गाँड हैल्प मी। वाट टू डू विथ हर ?? गुस्से मे चीखते हुए परफ्यूम की शीशी को जमीन मे पटककर कहते है ..एकदम गवाँर और छमकछल्लो लग रही हो है। मेरी लोगो के सामने खिल्ली उड़वाओगी क्या??
वंशिका आदित्य का व्यवहार देखकर थरथर काँपने लग जाती है । वो उसकी बाँहो को झकझोर करके कहते है। सुबह बोल कर गया था न तुम्हे अच्छे से तैयार होना। बोला था न तुम्हें कि रेड साड़ी पहनना है। बोलते हुए उनका गुस्से का पारा आसमान छू रहा था। लेकिन मेरी बाते तो तुम्हारे भेजे मे घुसती नहीं। पूरा हवेली की जिम्मेदारी संभाल सकती हो मगर तुम्हारा पति तुम से क्या चाहता है , वो तुम्हारे भेजे मे नहीं जाती है। पता भी है हम काकटेल पार्टी मे जा रहे है। जहाँ मेरे दोस्त और उनकी पत्नियांँ रहेगी। ब्लैक एंड रेड थीम है। अगर आज कपल मे नहीं जाना होता तो अच्छा रहता।
"जाओ जल्दी से चेंज कर के आओ।"
वंशिका के मुहँ से भय से बोली नहीं निकलती है।
आदित्य गर्ज़ते हुए कहते है "खड़ी खड़ी मेरा मुहँ क्या देख रही हो। जाओ जल्दी से साड़ी पहन कर आओ। मै तुम्हे दस मिनट देता हूँ । इस दस मिनट मे अगर तुम तैयार नहीं हुई तो सोच लेना तुम्हारा क्या हश्र करुंँगा।" आदित्य चुटकी बजाते हुए वार्न करते हुए गुस्से से पैर पटकते हुए बाहर चला जाता है।
आदित्य सा बाहर आकर दृश्या को आवाज देता है।
दृश्या ........दृश्या
"जी हुक्म"
जाकर वंशिका की मदद करो तैयार होने मे ,दस मिनट मे मुझे वो तैयार चाहिए।
मै भी सोचती हुई जाती हूँ वंशिका सा तो तैयार थी
फिर से तैयार होने की क्या जरुरत है।
देखती हूँ जाकर आँखे भरी हुई थी ।वो हाथो से चूडिय़ांँ उतार रही थी।
"क्या हुआ बहु सा?? थाने फिर से तैयार होने क्यो बोल रहे है।" दृश्या ने पूछा
बोली बतानो को समय ना है। दस मिनट की समय है मेरे पास। वंशिका ने कहा
मै फटाफट अलमारी से रेड रंग की साड़ी निकाल कर देती हूँ। वंशिका बहु की तैयार होने मे मदद करती हूँ। दस मिनट होते ही आदित्य सा आकर देखते है। वंशिका बहु को आकर कहते है।
बुदबुदाते हुए कहते है। "कयामत'",,,,, लग रही हो साड़ी मे ,.अब से तुम घर मे भी साड़ी ही पहनोगी समझी।
वंशिका बहु डरते हुए धीरे से "जी" कहती है।
वो दोनो पहुंच जाते है पार्टी मे। पार्टी की चमक दमक देखकर वंशिका बहु चकित रह जाती है। वो कभी ऐसी पार्टी मे गई हुई नहीं थी। वो लोगो की बेबाकी पन देखकर बहुत हतप्रभ होती है। कैसे लोग खुलेआम हाथो मे गिलास लेकर जाम से जाम टकराकर पी रहे थे। एकदूसरे की बाहो मे झूल रहे थे। उन्हें सभी चीजे वहांँ बहुत अजीब लग रही थी। वो खुद मे सिमटी जा रही थी। बड़े बड़े लोग आदित्य की और उसकी पत्नी की तारीफ पर तारीफ कर रहे थे।
यू बाथ आर मेड फाँर इच अदर ,.यू र वाईफ इज टू गारजियस , वगैरह वगैरह..
वंशिका को वो माहौल बहुत अजीब लग रहा था। उस पर सबकी घूरती निगाहें उसे हैरान परेशान कर रही थी। आहिस्ता आहिस्ता वो खुद को माहौल मे सहज रखने की कोशिश करती है।
जल्द ही वंशिका अपने मिलनसार स्वभाव के कारण आदित्य के दोस्तो एवं उनकी मिसेज से बात करते हुए सहज हो जाती है। उन लोगो के साथ घुलमिल जाती है।
डिनर करने के बाद सभी डी जे फ्लार पर थिरकने लगते है। आदित्य और वंशिका एकदूसरे के कमर मे हाथ डालकर थिरक रहे थे। आज वंशिका पहली बार आदित्य के इतने करीब थी। आदित्य नशे मे झूमते हुए प्यार से उसके साथ डांस कर रहा था। अंजुरी भर कर दोनो गालो को पकड़कर उसके माथे को चूमता है। लाज के मारे उसकी नजरे जमीन मे गढी जा रही थी। वंशिका सबके सामने असहज महसूस करने लग जाती है। वो जैसे ही जाने के लिए मुड़ती है। आदित्य उसे खींच कर गोल घुमाकर अपने बेहद करीब लाकर गले से लगा लेता है। दोनो ही एकदूसरे की आँखो मे खो जाते है।
वंशिका के तन मे सिरहन हो रही थी। आज उसका स्पर्श उसे रोमांचक लग रहा था। वंशिका को पहली बार अपनी और आदित्य के दिल की धड़कनों की शोर सुनाई दे रही थी। आज वंशिका को हल्का हल्का इश्क का नशा चढ़ रहा था। वंशिका का दिल कह रहा था।
काश !! इस रात की सुबह कभी हो ना ,
जिंदगी भर मै तेरी बाँहो मे यूँ ही सिमटी रहूँ।
मल्टीकलर की रोशनी की जगमगहाट मे वंशिका का सौंदर्य चार चाँद लगा रहा था। दोनो एकदूजे मे खोए हुए थे।
तभी आदित्य की दोस्त आकर कहती है। "आदि क्या मै आपके साथ डांस कर सकती हूँ ।"
"या श्योर डीयर" कहकर आदित्य अपनी दोस्त के साथ चला जाता है।
वंशिका आदित्य को उसके साथ बाहों मे बाहें डालकर जाते हुए देख रही थी।
तभी वहांँ आदित्य का दोस्त आकर वंशिका से कहता है । "कैन वी डांस टुगेदर" वंशिका कुछ जवाब देती उससे पहले ही वह उसकी कमर में हाथ डाल कर डांस करने लग जाता है। वो आदित्य की तरफ देखती है। मगर जगमगाती रोशनी मे उसे वो नजर नहीं आते है। न चाहते हुए भी वंशिका को उसके साथ डांस करना पड़ा। उसकी छुअन वंशिका को चुभ रही थी।
वंशिका तुरंत हाथ छुड़ाकर "एसक्यूज मी" कहकर डी जे फ्लार से उतरकर जाकर पानी पीती है।
एक चेयर मे जाकर चुपचाप बैठ जाती है। उसे ऐसी पार्टी की आदत नहीं थी , तो उसे घुटन महसूस होने लगती है। तभी वहांँ आदित्य का भाई हिमांशु आकर उसके पास बैठ जाता है। वंशिका उसे पहले से जानती थी इसलिए उसके साथ घुलमिलकर हँसी मजाक करती हुई बात करने लग जाती है।
हवेली लौटते हुए काफी रात हो जाती है। वंशिका पार्टी मे जाने से पहले बहुत दुखी थी मगर पार्टी से लौटते वक्त उसकी हँसी चेहरे से जा ही नहीं रही थी।
क्रमशः

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