भारतीय घरों में हर आंगन में तुलसी का पौधा होता है,और उसकी पूजा की जाती है।तुलसी का पौधा पूज्यनीयऔर औषधीय गुणों से युक्त होता है।तुलसी के धार्मिक महत्व के कारण हर घर आंगन में इसके पौधे लगाए जाते हैं।इनकी कई प्रजाति मिलती है जिनमें श्वेत व कृष्ण प्रमुख हैं,जिन्हें क्रमशःराम तुलसी और कृष्ण तुलसी के नाम से जाना जाता है।तुलसी के फूल सफेद और बैगनी रंग के होते हैं।
वैज्ञानिक नाम - ऑसीमम सैक्टम
उत्पत्ति - धार्मिक कथाओं के अनुसार देव व दानवो द्वारा किए गए समुद्र मंथन के समय,जो अमृत धरती पर मिला,उसी के प्रभाव से ही तुलसी की उत्पत्ति हुई। तुलसी के पौधे से जुड़ी हुई और भी किवदंतिया है।
औषधीय गुण - तुलसी के पत्ते का नियमित सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने में भी मदद करता है।त्वचा संबंधी कोई भी समस्या में तुलसी के पत्ते कारगर साबित होते हैं।शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं, तुलसी का काढ़ा पीने से दमा,कफ और सर्दी में राहत मिलती है।
सभी रोगों को दूर करने और शारीरिक शक्ति बढ़ाने वाली गुणों से भरपूर इस औषधीय पौधे को प्रत्यक्ष देवी कहा गया है।क्योंकि इससे ज्यादा उपयोगीऔषधि मनुष्य जाति के लिए दूसरी कोई नहीं है। तुलसी का पौधा हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक ही होता है।
धार्मिक महत्व- हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे का प्राचीन काल से ही महत्व है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिस घर में सुबह स्नान के बाद तुलसी के पौधे में जल चढ़ाया जाता है,और शाम होते ही तुलसी के पौधे के पास दीपक की जाती है। उस घर में सुख समृद्धि का वास होता है।हर धार्मिक अनुष्ठान में तुलसी के पौधे का विशेष महत्व होता है।भगवान विष्णु जी का प्रसाद तुलसीदल के बिना अधूरा माना जाता है।
पर्यावरण में महत्व - तुलसी के पौधे का वैज्ञानिक महत्व भी है। यह पौधा 24 घंटे ऑक्सीजन देने वाला होता है। वातावरण को शुद्ध बनाए रखने में मदद करता है।तुलसी के पौधे से कीट-मकोड़े भी दूर रहते हैं।और इसके आसपास हमेशा स्वच्छता का अनुभव होता है।
🌿तुलसी को संजीवनी बूटी के सामान भी माना जाता है,जो पर्यावरण संतुलित करने में भी मदद करती हैं।🌿
मनीषा भुआर्य ठाकुर(कर्नाटक)

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