प्रतीचि में अस्त होता आफताब
देता एक नई उम्मीद का सन्देश
दूर कर तम जीवन के हर पल से
एक उजास की भोर का है स्वागत
बन रही अब परिस्थितियां अनुकूल
बीत चला जो वक़्त था प्रतिकूल
एक नई ऊर्जा का संचार हुआ क्लांत मन में
सुलझ रही जो उलझनें थी जीवन में
व्यर्थ की चिंता में हो क्यों वक़्त बर्बाद
कर्म करें जिनसे ये दिल हो आबाद
किसे सुनाएँ, कोई नहीं सुनता है
इस बैचेन दिल की फरियाद.....
नेहा शर्मा

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