विश्व पटल पर
अपने साहस
के बल पर ,
उठा कर भार
किया सपनों
को साकार
मातृभूमि का
मान बढ़ाया
दृढ़ संकल्पित होकर
झूम उठी
टोक्यो में
देश का तिरंगा लहराकर
समय -समय पर
विरोधी को देती
कड़ी टक्कर
विजय हासिल
करती उम्मीद से
ज्यादा भार उठाकर
नमन करूँ तेरे
मात - पिता को
जन्म देकर
धरा को अनमोल
तोहफा दिया
नमन करू
तेरे हौसलो की
उड़ान को
विपरीत हवाओं में
भी आसमाँ की
ऊंचाइयों को छुआ
कभी चाँदी,
कभी सोना,
पहनाकर
भारत माँ के
मस्तक को शुशोभित किया
युगों - युगों तक
होता रहेगा
तेरा गुणगान
बेटी बनकर जन्मी
बढ़ाया सबका सम्मान
जन्मों तक तेरे
हौसले की गूंज
सुनाई देगी
पीढ़ी दर पीढ़ी
तेरी विजय गाथा
गाई जायेगी
सुन मीरा तुझें
हम सब
देश वासियों का सलाम
............@ नेहा धामा " विजेता "

0 टिप्पणियाँ