आज डॉक्टर्स डे है,हम अपने डॉक्टर्स के साहस और जज्बे को सलाम करते हैं।
विशेषकर इस कोरोना काल में जिस जज्बे के साथ डॉक्टरों ने दिन रात एक कर मरीजों की सेवा की,उनका ध्यान रखा ,सचमुच वे सफेद कोट में ईश्वर ही रहे,।
वो अदृश्य ईश्वर जो हमारी सहायता किसी को माध्यम बना कर कर देता है,वो थे डॉक्टर।
आज हम इस मौके पर हम याद करते हैं भारत की पहली महिला डॉक्टर आनंदी गोपाल जोशी की।
19 वीं सदी के उस दौर में,अशिक्षा, धार्मिक कुरीतियां समाज में सांप की तरह फन उठाए खड़ी थीं।
31 मार्च 1865 ब्राह्मण कुल में जन्मी,यमुना नाम था इनका, शिक्षा के नाम पर वर्णमाला का कोई भी अक्षर ज्ञात नहीं।
समाज में बाल विवाह,जोरों पर था 9 साल की उम्र में इनका विवाह , अपने से 20 साल बड़े विधुर, गोपाल जोशी से संपन्न हुआ।
पति को शिक्षा में रुचि थी , समाज की परवाह किए बिना उन्होंने यमुना को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।ससुराल में यमुना का नाम आनंदी रखा गया।
14 साल की उम्र में आनंदी ने एक बच्चे को जन्म दिया ,जिसकी 10 दिन के बाद ही आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में मृत्यु हो गई।
इस घटना से आनंदी के जीवन में एक मोड़ ले आया।उसने शिक्षा प्राप्त कर डॉक्टर बनने की ठानी।
उनके इस मिशन को सफल बनाने का बीड़ा उठाया उनके पति ने। उन्होंने अमेरिका के रॉयल विल्डर कॉलेज में पत्र लिख कर दाखिले का आवेदन किया ,मदद के नाम पर उन्होंने ईसाई धर्म अपनाने की पेशकश की,जो गोपाल जोशी ने अस्वीकार कर दी।बाद में उनके लगातार प्रयास से एक डॉक्टर दंपत्ति ने आनंदी को महिला मेडिकल कॉलेज ऑफ पेंसिलवानिया का सुझाव भेजा।
उस समय गोपाल जोशी कलकता के श्रीरामपुर में थे।
समाज में पुरजोर विरोध शुरू हो गया,हिंदू समाज विदेश में जाकर पढ़ाई करने से खासा नाराज था।
इस विरोध के बीच हिम्मत से आनंदी आगे आएं ,और श्रीराम कॉलेज में अपना पक्ष रखा ,उन्होंने महिला डॉक्टर की समाज की जरूरत बताई,उन्होंने ये भी कहा कि,वे या उनका परिवार ईसाई धर्म को कभी नहीं स्वीकार करेंगे,और मेडिकल डिग्री लेने के बाद , वे देश में आकर महिला मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रयास करेंगी।
उनके इस व्याख्यान को सुन लोग बहुत प्रभावित हुए।देश भर से आर्थिक मदद भी भेजी जानी लगी
पानी के जहाज से कोलकता से अमेरिका के लिए रवाना हुई।
19 साल की उम्र में उन्होंने मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया।
1886 में उन्होंने मेडिकल डिग्री प्राप्त की।
और भारत आकर कोल्हापुर के अल्बर्ट एडवर्ड हॉस्पिटल में आकर महिला विभाग का कार्यभार संभाला।
लेकिन दुर्भाग्य वे टीबी से ग्रसित हो गईं। 26 फरवरी 1887 में 22साल की अल्पावधि में देश ने अपनी होनहार महिला डॉक्टर को खो दिया।
भारत की पहली महिला डॉक्टर आनंदी गोपाल जोशी के जुनून और जज्बे के लिए डॉक्टर्स डे पर सलाम।

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